रिटायर्ड मुख्य सचिव से ज्यादा मानदेय रिटायर्ड मैनेजर को

Updated at : 06 Jul 2018 5:11 AM (IST)
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रिटायर्ड मुख्य सचिव से ज्यादा मानदेय रिटायर्ड मैनेजर को

रांची : अनुबंध पर नियुक्त कोऑपरेटिव बैंक के मैनेजर को अनुबंध पर नियुक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी से ज्यादा मानदेय दिया जा रहा है. वित्त विभाग के आदेश के आलोक में मुख्य सचिव स्तर के रिटायर्ड अधिकारी को अनुबंध पर नियुक्त करने पर 65 हजार रुपये मानदेय देने का प्रावधान है. पर कोऑपरेटिव बैंक […]

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रांची : अनुबंध पर नियुक्त कोऑपरेटिव बैंक के मैनेजर को अनुबंध पर नियुक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी से ज्यादा मानदेय दिया जा रहा है. वित्त विभाग के आदेश के आलोक में मुख्य सचिव स्तर के रिटायर्ड अधिकारी को अनुबंध पर नियुक्त करने पर 65 हजार रुपये मानदेय देने का प्रावधान है. पर कोऑपरेटिव बैंक के मैनेजर उमेश चंद्र सिंह को रिटायरमेंट के बाद अनुबंध पर नियुक्त कर प्रति माह 83 हजार 458 रुपये की दर से मानदेय दिया जा रहा है, जबकि उन्हें रिटायरमेंट के समय 78,800 रुपये वेतन मिल रहा था. इस अधिकारी द्वारा दिया गया दो करोड़ रुपये का कर्ज एनपीए हो गया है. रिटायरमेंट के बाद अनुबंध पर नियुक्त होने के बाद इस अधिकारी ने पांच करोड़ रुपये कर्ज दिया है. इसके भी एनपीए होने की आशंका जतायी जा रही है.

वित्त विभाग ने 28 अप्रैल 2016 को एक आदेश जारी किया था. इसमें रिटायर्ड कर्मचारियों को अनुबंध पर रखने के लिए नीति निर्धारित की गयी थी. साथ ही वेतनमान और पे-बैंड के आधार पर अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों को देय मानदेय का उल्लेख किया गया था. वित्त विभाग के इस आदेश के आलोक में 9300 व 4600 के ग्रेड-पे में रिटायर करनेवाले कर्मचारी को अनुबंध पर रखने की स्थिति में उसे प्रति माह 25 हजार रुपये मानदेय दिया जा सकता है. पर कोऑपरेटिव बैंक के मैनेजर उमेश चंद्र को रिटायर होने के बाद अनुबंध पर रख कर 83,458 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जा रहा है. इतना मानदेय मुख्य सचिव के वेतनमान में रिटायर करनेवाले अधिकारी को भी नहीं दिया जा सकता है. वित्त विभाग के आदेश के आलोक में मुख्य सचिव के वेतनमान में रिटायर अधिकारी को 65,000 रुपये प्रति माह मानदेय देने का प्रावधान है. कोऑपरेटिव बैंक में अनुबंध पर नियुक्त इस मैनेजर के कारनामे सहकारिता के क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा है.
इन्होंने कोऑपरेटिव बैंक के जादूगोड़ा ब्रांच में पदस्थापित रहने के दौरान करोड़ों के कर्ज बांटे थे. इसमें से दो करोड़ रुपये एनपीए हो गये हैं. रिटायरमेंट के बाद अनुबंध पर नियुक्त होने के पांच महीने में इन्होंने करीब पांच करोड़ रुपये का कर्ज बांट दिया है. इसके भी एनपीए होने की आशंका जतायी जा रही है. उमेश चंद्र सिंह पिछले 22 वर्षों से कोऑपरेटिव बैंक के जादूगोड़ा ब्रांच में ही पदस्थापित हैं. वर्ष 1986 में नौकरी में आने के बाद सरकार ने वर्ष 1995 में उन्हें कोऑपरेटिव बैंक के जादूगोड़ा ब्रांच में पदस्थापित किया.
वह 1995 से ही लगातार बैंक के इसी ब्रांच में पदस्थापित रहे. प्रोमोशन मिलने के बाद भी अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए बैंक के इसी ब्रांच में मैनेजर के रूप में पदस्थापित रहे. यहां तक कि रिटायरमेंट के बाद भी अनुबंध पर इसी बैंक में अनुबंध पर एक साल के लिए नियुक्त हो गये. चर्चा है कि वह एक आइएएस अधिकारी के रिश्तेदार हैं और इसी का लाभ उठा रहे हैं. 31 दिसंबर 2017 को वह कोऑपरेटिव बैंक के जादूगोड़ा ब्रांच से रिटायर हुए. पर एक जनवरी 2018 से ही उन्हें इसी बैंक में अनुबंध पर नियुक्त कर लिया गया. उनकी राजनीतिक पहुंच और रसूख की वजह से अनुबंध पर नियुक्ति के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं की गयी. साथ ही अनुबंध पर मानदेय तय करने में वित्त विभाग के आदेश का उल्लंघन किया गया.
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