पंचायतें आसानी से कर सकती हैं उग्रवाद का समाधान

इफेक्टिव डेवलपमेंट एंड गुड गवर्नेंस विषय पर आयोजित सेमिनार में एसएन विजयानंद ने कहा रांची : भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त व केरल में पंचायतों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले एसएस विजयानंद ने कहा कि झारखंड में उग्रवाद की समस्या का हल पंचायतें आसानी से कर सकती हैं, क्योंकि पंचायतें लोगों के बहुत […]
इफेक्टिव डेवलपमेंट एंड गुड गवर्नेंस विषय पर आयोजित सेमिनार में एसएन विजयानंद ने कहा
रांची : भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त व केरल में पंचायतों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले एसएस विजयानंद ने कहा कि झारखंड में उग्रवाद की समस्या का हल पंचायतें आसानी से कर सकती हैं, क्योंकि पंचायतें लोगों के बहुत करीब होती हैं.
वार्ता के माध्यम से यह किया जा सकता है. श्री विजयानंद बुधवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार में पंचायती राज विभाग की अोर से इफेक्टिव डेवलपमेंट एंड गुड गवर्नेंस विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे.
उन्होंने कहा कि बिना लागत के पंचायतों में विकास के कार्य किये जा सकते हैं. इसके तहत सारे विभागों के जो कार्य पंचायतों के विकास के लिए हैं, उसे अगर सही तरीके से मॉनिटरिंग की जाये और उसे लागू कराया जाये, तो इसमें अतिरिक्त खर्च की जरूरत नहीं होगी और विकास के कार्य हो सकेंगे.
अलग-अलग राज्यों में विकास का पैमाना अलग है. इसमें झारखंड पिछड़ा है, लेकिन पंचायती राज के माध्यम से लोगों तक विकास पहुंचाया जा सकता है.
मौके पर कर्नाटक सरकार में लंबे समय तक पंचायती राज सचिव रहे टीआर रघुनंदन ने कहा कि यह न सोचें कि दक्षिण भारत में सब कुछ अच्छा है. हमारे यहां भी भ्रष्टाचार है. कुछ राजनीतिक लोग अच्छे नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि अधिकार मिलेगा नहीं, बल्कि लेना होगा. यहां पंचायतों को मजबूत करना होगा. उन्हें खुल कर अधिकार देना होगा. एक कलेक्टर पर इतना काम का दबाव देंगे, तो कैसे होगा. उन्होंने कहा कि पंचायतों के विकास के लिए राशि देनी होगी और पर्याप्त संख्या में काम करने के लिए मैन पावर देने होंगे, तभी ठीक से काम हो सकेगा.
पंचायती राज सचिव विनय चौबे ने जिला परिषद अध्यक्षों से कहा कि उन्हें अधिकार के साथ कर्तव्य भी जानने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि पंचायती राज की जो शक्तियां मिली हैं, उसे धरातल पर उतारें, तो आगे की शक्तियां मिलेंगी.
मौके पर 14 विभागों ने अपना-अपना प्रजेंटेशन दिया, जिन्होंने अपनी शक्तियां पंचायतों को दी है. सेमिनार में जिला परिषद अध्यक्षों के अलावा उप विकास आयुक्त व जिला पंचायती राज पदाधिकारी मौजूद थे.
बैठक में एक जनप्रतिनिधि ने उठाया सवाल : सेमिनार के दौरान जब सचिव विनय चौबे बोल रहे थे, उस दौरान एक जिप अध्यक्ष ने वहां मिली पुस्तक पर सवाल उठाया. बीच में उठ कह वह कहने लगे कि कुछ भी अधिकार नहीं मिला है. पुस्तक में सब गलत चीजें छपी हुई हैं. सचिव के समझाने पर वे शांत हुए.
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