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मैं CM था, CM हूं और कल भी CM रहूंगा, CII के ट्राइबल डेवलपमेंट मीट में बोले झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास

Updated at : 30 Jun 2018 3:19 PM (IST)
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मैं CM था, CM हूं और कल भी CM रहूंगा, CII के ट्राइबल डेवलपमेंट मीट में बोले झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास

रांची : हूल क्रांति की वर्षगांठ पर आदिवासियों के समावेशी विकास के मुद्दे पर चर्चा के लिए कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ) द्वारा होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित ‘ट्राइबल डेवलपमेंट मीट’ में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, मैं कल भी सीएम था, आज भी सीएमहूं और कल भी सीएम रहूंगा. रहूंगा न!’ समारोह के उद्घाटन […]

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रांची : हूल क्रांति की वर्षगांठ पर आदिवासियों के समावेशी विकास के मुद्दे पर चर्चा के लिए कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ) द्वारा होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित ‘ट्राइबल डेवलपमेंट मीट’ में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, मैं कल भी सीएम था, आज भी सीएमहूं और कल भी सीएम रहूंगा. रहूंगा न!’ समारोह के उद्घाटन सत्र को संबोधित करतेहुएमुख्यमंत्री ने आदिवासी युवाओं से संकोच छोड़कर, निडर होकर उद्यमिताके क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपील की.विरोधीदलों पर जोरदार हमला बोला. कहा कि विपक्षी दलों के नेता नकारात्मकता का संचार कर प्रदेश के विकास में बाधक बने हुए हैं. जल, जंगल और जमीन की बात करके आदिवासियों को डरा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यह प्रदेश आदिवासियों का है. किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि उनकी जमीन उनसे छीन ले. उनकी सरकार झारखंड के साथ-साथ आदिवासियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है.

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बाद में मुख्यमंत्री ने सीएम का फुल फॉर्म भी बताया. उन्होंने सीएम का अर्थ कॉमन मैन बताया. कहा कि गरीबी में पले-बढ़े हैं. इसलिए गरीबों का दर्द जानते हैं. वह एक आम आदमी हैं. सरकार किसी एक व्यक्ति या पार्टी की नहीं है. सरकार सबकी है. आदिवासी, दलित, गरीब और शोषित सभी की सरकार है. उन्होंने कहा कि झारखंड दुनिया का सिरमौर बन सकता है. आदिवासी युवाहरदिन जोखिम लेता है, इसलिएयदिउन्हेंप्रोत्साहितकिया जाये, तो वे बेहतर उद्यमी बन सकते हैं.

सीएम ने कहा कि पलायन नासूर बन गया है. झारखंड की एक बच्ची को तीन-तीन बार बेचा जाता है. खूंटी में बेटियों से बलात्कार होता है. श्री दास ने कहा कि वह पलायनमुक्त झारखंड बनायेंगे. इसके लिए गांवों में उद्योगों का जाल बिछाया जायेगा. बच्चे अपने गांव में रहेंगे, अपने घर में रहेंगे. अपने माता-पिता के पास रहेंगे. सीएम ने कहा कि झारखंड सरकार की नीतियों की वजह से आज विदेशी कंपनियां यहां उद्योग लगाने आ रही हैं. कुछ ही दिनों में 25,000 से ज्यादा युवाओं को टेक्सटाइल इंडस्ट्री में 15,000 रुपये तक की नौकरी मिलेगी.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में श्रम संसाधन की कमी नहीं है. आदिवासी युवा चाहें, तो दुनिया को श्रम बल की सप्लाई कर सकते हैं. सीएम ने कहा कि एमएसएमइ, लघु उद्योगों और कॉटेज इंडस्ट्री के जरिये झारखंड को समृद्ध बनाने का प्रयास उनकी सरकार कर रही है. सीआइआइ के पदाधिकारियों से श्री दास ने कहा कि विकास और रोजगार के बीच तालमेल जरूरी है. आदिवासी युवाओं के भविष्य के मद्देनजर वे योजनाएं बनायें, ताकि उद्योगों का भी विकास हो, आदिवासियों का भी विकास हो और राज्य का भी विकास हो.

रघुवर दास ने कहा कि समय के साथ सोच में बदलाव लायेंगे, तभी आगे बढ़ पायेंगे. कुछ लोग आदिवासियों को कुआं का मेढ़क बनाकर रखना चाहते हैं. ऐसे लोगों को कुचलने की जरूरत है. इन्हें विफल करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि 12 नवंबर को एक लाख लोगों को रोजगार देने का सरकार ने लक्ष्य तय किया है. सीएम ने युवाओं से अपील की कि वे सपने देखें. बड़े सपने देखें. साधना करें. सफलता उनके कदम चूमेगी. दुनिया की कोई ताकत उन्हें सफल होने से नहीं रोक पायेगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के उत्पाद की सबसे बड़ी खरीदार झारखंड सरकार है. आज नगड़ी की सब्जियां यूरोप जा रही हैं. बांस की टोकरी की विदेशों में सप्लाई की योजना है. सीएम ने कहा कि ज्ञान, विज्ञान और तकनीक से लैस आदिवासी आगे बढ़ेगा, गरीबी को नेस्तनाबूद कर देंगे. उन्होंने कहा कि आदिवासियों का अपने ही लोग शोषण कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आदिवासियों को ऐसा माहौल बनाना है कि उनकी आने वाली पीढ़ी का बुरा हाल न हो. दूरदर्शी नीति अपनाकर झारखंड की बदहाली को खत्म करना होगा. इसके लिए विजन स्पष्ट होना चाहिए. ग्लोबल मार्केट के मद्देनजर अपना नजरिया बदलने की जरूरत है.

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समारोह को संबोधित करते हुए झारखंड के जाने-माने लोक कलाकार पद्मश्री मुकुंद नायक ने खत्म हो रहे अपनापन पर चिंता जतायी. उन्होंने कहा, ‘25-30 साल पहले गांव में कुछ नहीं था.लोग पढ़े-लिखे नहींथे. ऊंचे पदों पर नहीं थे, लेकिन लोग खुश थे. आज लोगों के पास सब कुछ है, लेकिन चेहरे पर हंसी नहीं है. मांदर की थाप और बंसी की धुन गायब हो गयी है. हमारा अखरा खत्म हो गया है. यह चिंता की बात है. अखरा नाच-गाना तक सीमित नहीं था. यह एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागिता का मंच था. संवाद के आदान-प्रदान का मंच था.’ श्री नायक ने इस चिंता को ‘पहिले अपन गांव रहे केतना सुंदर…’ गीत के माध्यम से व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है. आदिवासी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा करना भी जरूरी है. विकास योजनाएं इसको ध्यान में रखकर ही बनायी जानी चाहिए.

समारोह को उद्योग सचिव विनय चौबे, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार बर्णवाल, ट्राइबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (टिक्की) के पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष खेलाराम मुर्मू और दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (डिक्की) के पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष राजेंद्र जिवासिया ने भी संबोधित किया. उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने आदिवासी उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए मुफ्त में जमीन और सस्ती दर पर बिजली आदि उपलब्ध कराने की सरकार से अपील की. सीआइआइ झारखंड स्टेट काउंसिल के अध्यक्ष नीरज कांत ने अतिथियों का स्वागत और कार्यक्रम का संचालन किया.

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