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सरकारी धोखा : धान के एक लाख रुपये नहीं दिये, बेटी की शादी में लिये गये उधार को चुकाने के लिए परेशान है किसान

29 Apr, 2018 7:26 am
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सरकारी धोखा : धान के एक लाख रुपये नहीं दिये, बेटी की शादी में लिये गये उधार को चुकाने के लिए परेशान है किसान

रांची : कोडरमा जिले के असनाबाद गांव के रहने वाले किसान सुभाष प्रसाद ने 11 जनवरी को कुल 57.76 क्विंटल धान पास के मसमोहना पैक्स में दिया था. पर इसके एवज में करीब एक लाख रुपये का भुगतान आज तक नहीं हुआ है. सुभाष के साथ जो कुछ हो रहा है, उससे वह खुद को […]

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रांची : कोडरमा जिले के असनाबाद गांव के रहने वाले किसान सुभाष प्रसाद ने 11 जनवरी को कुल 57.76 क्विंटल धान पास के मसमोहना पैक्स में दिया था. पर इसके एवज में करीब एक लाख रुपये का भुगतान आज तक नहीं हुआ है. सुभाष के साथ जो कुछ हो रहा है, उससे वह खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. हालत यह है कि अपने पैसे पाने के लिए उन्होंने 24 फरवरी को मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र में शिकायत की. इसके बाद भी दो माह से अधिक बीत गये, पर सुभाष को उनके धान के पैसे नहीं मिले हैं.

शिकायत की तो कहा, उपायुक्त से ही पैसे ले लो : गौरतलब है कि सरकार 1700 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से धान लेती है. इस तरह सुभाष के बैंक खाते में कुल 98,192 रुपये सप्ताह भर के अंदर मिल जाने चाहिए थे. पर बार-बार पैक्स के चक्कर लगाने के बाद भी एक रुपये नहीं मिला. इस बाबत उपायुक्त कोडरमा से शिकायत की गयी, तो पैक्स वालों ने कहा कि अब उपायुक्त से ही पैसे ले लो. यही नहीं धान देने के करीब सवा महीने बाद 21 फरवरी को सुभाष के मोबाइल पर मैसेज आया कि उनका 53.08 क्विंटल धान ही पैक्स को मिला है, जिसका 90,236 रुपया एक सप्ताह में उनके खाते में चला जायेगा. जबकि धान लेते वक्त 57.76 क्विंटल की प्राप्ति दिखायी गयी है. इधर, लड़की की शादी में लिये गये उधार को चुकाने के लिए परेशान सुभाष ने बाद में इसकी शिकायत सीएम जनसंवाद केंद्र से भी की, पर हुआ कुछ नहीं.

धान देकर फंसे किसान

दरअसल, संबंधित इलाके के करीब डेढ़ सौ किसानों ने लगभग दो हजार क्विंटल धान बिचौलियों को दे दिया. जबकि उन्हें इसकी कीमत 1100-1200 रु प्रति क्विंटल ही मिली. वहीं सुभाष प्रसाद सहित जिन दो-तीन किसानों ने सरकार को अपना धान दिया, वे भी फंस गये हैं. अब तक किसी किसान को भुगतान नहीं हुआ है.

धान के साथ-साथ बोरा भी ले लिया
धान अधिप्राप्ति के दौरान किसानों से लिया गया धान लैंप्स या पैक्स को अपनी बोरी में रखना या लेना है. पर सुभाष से पैक्स वालों ने उसके घर जाकर बोरा सहित धान लिया. किसान को उसके 120 बोरे भी नहीं लौटाये गये.

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