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रांची : रिनपास अधीक्षक डॉ एके नाग का मामला, 7 अप्रैल को जेल से हुए रिहा, स्वास्थ्य विभाग ने 11 को निकाला निलंबन आदेश

28 Apr, 2018 6:51 am
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रांची : रिनपास अधीक्षक डॉ एके नाग का मामला, 7 अप्रैल को जेल से हुए रिहा, स्वास्थ्य विभाग ने 11 को निकाला निलंबन आदेश

रांची : रिनपास के अधीक्षक डॉ एके नाग सात अप्रैल 2018 को जेल से रिहा हुए. इसके बाद विभाग ने उनके निलंबन का आदेश निकाला है. डॉ नाग के रिहा होने के चार दिन बाद 11 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव वीरेंद्र कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में उन्हें 24 फरवरी […]

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रांची : रिनपास के अधीक्षक डॉ एके नाग सात अप्रैल 2018 को जेल से रिहा हुए. इसके बाद विभाग ने उनके निलंबन का आदेश निकाला है. डॉ नाग के रिहा होने के चार दिन बाद 11 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव वीरेंद्र कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में उन्हें 24 फरवरी 2018 से ही सस्पेंड बताया गया है.
इससे पहले डॉ नाग जेल से रिहा होने के बाद नौ अप्रैल को खुद विभाग जाकर स्वास्थ्य सचिव को अपनी रिहाई की जानकारी दी थी.
निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा. डॉ नाग को एसीबी रांची ने 24 फरवरी 2018 को हिरासत में लेते हुए बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया था.
निलंबन के प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री का अनुमोदन : विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डॉ नाग के निलंबन के प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है.
दूसरी तरफ डॉ नाग नियमित रूप से कार्यालय जा रहे हैं अौर कामकाज निबटा रहे हैं. डॉ नाग को उनके सस्पेंड की कोई लिखित जानकारी नहीं मिली है. जबकि विभाग ने डॉ नाग के सस्पेंड की जानकारी महालेखाकार व कोषागार पदाधिकारी को भी भेज दी है.
विभाग ने 24 फरवरी 2018 से ही सस्पेंड बताया, पर नहीं दी सूचना
नौ अप्रैल को रिनपास में योगदान दे दिया है. नियमित रूप से कार्यालय आ रहा हूं. कामकाज भी निबटा रहा हूं. इसकी लिखित जानकारी स्वास्थ्य सचिव को भी दी है. विभाग द्वारा मुझे रिहा होने के बाद निलंबित किया गया है, इसकी कोई लिखित जानकारी नहीं मिली है. – डॉ एके नाग
हाइकोर्ट ने निरस्त कर दिया था केस, इसके बाद भी भेजे गये जेल
जिस नियुक्ति घोटाले के केस को हाइकोर्ट ने 19 दिसंबर 2017 को निरस्त कर दिया था, उसी में एसीबी ने दो माह बाद डॉ नाग को कांके से हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था. प्रभात खबर ने छह अप्रैल को जब इस खबर को प्रमुखता से छापी गयी, तो अगले दिन डॉ नाग को जेल से रिहा कर दिया गया.
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