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...और फूट पड़ा महिला पारा शिक्षक का गुस्सा, बोली : लाठीचार्ज हो तो महिलाओं को आगे करो, मीडिया के सामने खुद नेता बनेंगे

Updated at : 23 Apr 2018 4:00 PM (IST)
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...और फूट पड़ा महिला पारा शिक्षक का गुस्सा, बोली : लाठीचार्ज हो तो महिलाओं को आगे करो, मीडिया के सामने खुद नेता बनेंगे

रांची : सीएम आवास का घेराव करने राजधानी रांची पहुंचे पारा शिक्षकों को विरोध मार्च के बाद मोरहाबादी के चिल्ड्रेन पार्क में रखा गया. अलग-अलग जिलों से पारा शिक्षक आंदोलन करने यहां आये हैं. मीडिया वाले शिक्षकों से बात कर रहे थे. तभी भीड़ से लाल साड़ी पहने एक महिला चिल्लाते हुए निकली.कहा : जब […]

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रांची : सीएम आवास का घेराव करने राजधानी रांची पहुंचे पारा शिक्षकों को विरोध मार्च के बाद मोरहाबादी के चिल्ड्रेन पार्क में रखा गया. अलग-अलग जिलों से पारा शिक्षक आंदोलन करने यहां आये हैं. मीडिया वाले शिक्षकों से बात कर रहे थे. तभी भीड़ से लाल साड़ी पहने एक महिला चिल्लाते हुए निकली.कहा : जब लाठी खाना हो, तो महिलाओं को आगे कर देते हो. जब कैमरे पर आना हो, तो हमें पीछे कर देते हैं. नेता बनने में लगे हैं सब.’

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग पारा शिक्षकों से बात कर रहे थे. चारोंओर से पारा शिक्षकों ने अपने नेता और टीवी पत्रकार को घेर रखा था. इसी भीड़ से महिला निकली. वह बेहद नाराज थी. उसकी नाराजगी दूर करने अचानक कुछ लोग आये और समझाते हुए उसे दूर ले गये. एक दूसरी महिला अपने किसी पुरुष साथी से आंदोलन की सफलता पर चर्चा कर रही थी. नेता कह रहे थे कि वे बैरिकेटिंग तक पहुंच गये. उनका आंदोलन सफल है.

उन्होंने मजबूरी भी बतायी. कहा, ‘अब वहां से हमें पुलिस ने आगे जाने नहीं दिया, तो क्या करें.’ कई शिक्षक हताश और निराश थे, लेकिन सरकार की तरफ से आये न्योते के बाद सबके मन में एक आस भी दिख रही थी. आगे आंदोलन की दिशा क्या होगी? कई लोगों को इस सवाल का जवाब नहीं पता. किन-किन जिलों से लोग आये हैं, इस बारे में किसी के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं थी.

जब बच्चों जैसा व्यवहार करने लगे शिक्षक

पारा शिक्षकों को मैदान में रोका गया, लेकिन यहां पीने के पानी की सुविधा तक नहीं थी. चिल्ड्रेन पार्क के गार्ड परेशान थे.पारा शिक्षक बच्चों जैसा व्यवहार कर रहे थे. बच्चों के पार्क में पारा शिक्षक झूले पर बैठे थे. कोई हिरण की मूर्ति पर बैठ गया, तो कई बाघ पर सवार हो गया. यहां तैनात गार्ड सभी को रोक रहे थे.

शिक्षकों के अलग-अलग गुट

शिक्षकों के अलग-अलग गुट बने थे. सभी चार-पांचका झुंड बनाकर बैठे थे और आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे. कहीं मौजूदा राजनीति पर चर्चा हो रही थी.

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