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VIDEO : 1965 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन के दांत खट्टे करनेवाले CRPF के शौर्य को झारखंड ने किया सलाम

Updated at : 09 Apr 2018 12:33 PM (IST)
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VIDEO : 1965 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन के दांत खट्टे करनेवाले CRPF के शौर्य को झारखंड ने किया सलाम

रांची : भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान रन ऑफ कच्छ (गुजरात) स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा देने वाले सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के जवानों की याद में पूरे झारखंड में सोमवार को शहीद दिवस मनाया गया. इस अवसर पर सेना के इस्तेमाल में आने वाले हथियारों की विशेष […]

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रांची : भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान रन ऑफ कच्छ (गुजरात) स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा देने वाले सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के जवानों की याद में पूरे झारखंड में सोमवार को शहीद दिवस मनाया गया. इस अवसर पर सेना के इस्तेमाल में आने वाले हथियारों की विशेष प्रदर्शनी लगायी गयी. स्कूली बच्चों को इसके बारे में विस्तार से बताया गया. इतना ही नहीं, डॉग शो और यूएवी (नेत्र) के विजुअल भी आकर्षण का केंद्र रहे. शाम को कार्यक्रम के अंत में 150 जवान स्वेच्छा से रक्तदान करेंगे.

https://www.youtube.com/watch?v=jX41o3jctGE

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि 133वीं बटालियन के सभी कैंप में शौर्य समारोह का आयोजन किया गया है. रांची के धुर्वा स्थित कैंप में संजय आनंद लाठकर (आइपीएस, पुलिस महानिरिक्षक, झारखंड सेक्टर)समारोह के मुख्य अतिथि थे. सीआरपीएफ के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियोंने भी समारोह में शिरकत की और वीर जवानों एवं शहीदों के परिजनों को शॉल देकर सम्मानित किया.

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यहां बताना प्रासंगिक होगा कि सीआरपीएफ की द्वितीय वाहिनी की चार कंपनियोंने सरदार द टांक पोस्ट, जो कि रन ऑफ कच्छ (गुजरात) में पश्चिमी पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है, की सुरक्षा के लिए तैनात थी. 8- 9 अप्रैल की मध्यरात्रि के बाद लगभग 03:30 बजे पाकिस्तान की इन्फेंट्री ब्रिगेड ने सरदार द टांक की भारतीय सीमा पोस्ट पर आक्रमण कर दिया.

सीआरपीएफ के जवानों की छोटी-सी इस टुकड़ी ने पाकिस्तानी ब्रिगेड को मुंहतोड़ जवाब दिया. 34 पाकिस्तानी फौजियोंको मौत के घाट उतार दिया औरदुश्मनसेना के 4 जवानों को जिंदा गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान सीआरपीएफ के 8 जवान शहीद हो गये, लेकिन इस टुकड़ी के सदस्यों ने पाकिस्तानी सेना को 13 घंटे के बाद पीछे हटने के लिए विवश कर दिया.

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सैन्य युद्ध के इतिहास में इस युद्ध को अनुपम कौशल वह अद्वितीय बहादुरीका एक बेजोड़ मिसाल माना जाता है,जब अर्धसैनिक बल की एक छोटी-सी टुकड़ी ने पूरी इनफ्रैंट्री ब्रिगेड को युद्ध के मैदान से खदेड़ दियाथा. उसी दिन से संपूर्ण भारतवर्ष में प्रत्येक वर्ष 9 अप्रैल को ‘वीरता दिवस/शौर्य दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

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