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झारखंड : कम हो रही है राजस्व वसूली, सरकार को करनी पड़ सकती है खर्च में कटौती

शकील अख्तर रांची : सरकार को इस वित्तीय वर्ष (2017-18) में अक्तूबर तक अपने स्रोतों से 7814.01 करोड़ का ही राजस्व मिला है. वहीं, सरकार ने विभिन्न विभागों से कुल 28409.16 करोड़ की वसूली का लक्ष्य रखा है. अक्तूबर तक तो राजस्व वसूली निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 27.50 प्रतिशत रही है. इस स्थिति को […]

शकील अख्तर
रांची : सरकार को इस वित्तीय वर्ष (2017-18) में अक्तूबर तक अपने स्रोतों से 7814.01 करोड़ का ही राजस्व मिला है. वहीं, सरकार ने विभिन्न विभागों से कुल 28409.16 करोड़ की वसूली का लक्ष्य रखा है. अक्तूबर तक तो राजस्व वसूली निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 27.50 प्रतिशत रही है.
इस स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर सरकार के सामने खर्च के मुकाबले पैसों की कमी होने की (रिसोर्स गैप) आशंका जतायी जा रही है. ऐसा होने पर सरकार को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है. बजट बनाते समय राज्य सरकार विभिन्न स्रोतों से आमदनी का अनुमान करती है. इसी आमदनी के अनुरूप योजनाओं पर खर्च की राशि निर्धारित की जाती है. चालू वित्तीय वर्ष (2017-18) के लिए सरकार ने 75673.42 करोड़ के खर्च का मूल बजट पेश किया था.
यानी सरकार को अनुमान था कि उसे यह रकम विभिन्न स्रोतों (अपने स्रोत, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी, केंद्रीय सहायता अनुदान और कर्ज) से मिल जायेगी. इस राशि में सरकार ने अपने राजस्व स्रोतों से 28409.16 करोड़ की आमदनी का अनुमान लगाया था. यह राशि सरकार को वाणिज्यकर, खान, उत्पाद, परिवहन, निबंधन और भू-राजस्व विभाग से टैक्स के रूप में मिलनी थी. पर सरकार को इन विभागों से अब तक लक्ष्य के अनुरूप पैसे नहीं मिल पाये.
वाणिज्यकर में सुधार का अनुमान : राजस्व वसूली में सभी विभाग काफी पीछे हैं. प्रशासनिक स्तर पर वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही तक वाणिज्यकर विभाग के राजस्व में सुधार का अनुमान किया जा रहा है. लेकिन अन्य सभी विभागों को लक्ष्य से काफी पीछे रहने की आशंका जतायी जा रही है.
इस बीच सरकार की ओर से दो अनुपूरक बजट पेश किये जाने से राजस्व का बोझ बढ़ गया है. प्रथम अनुपूरक से सरकार पर 611.87 करोड़ और दूसरे अनुपूरक से 1177.88 करोड़ रुपये का राजस्व भार पड़ा. यानी सरकार को अब सभी स्रोतों से पहले के मुकाबले अधिक पैसों की जरूरत होगी. पहले सरकार को कुल 75673.42 करोड़ की जरूरत थी. अनुपूरक बजट के बाद 76950.27 करोड़ रुपये की जरूरत हो गयी है. सरकार को पैसों की बढ़ती जरूरत और अामदनी में लक्ष्य से काफी पीछे होने की वजह से रिसोर्स गैप की आशंका जतायी जा रही है.
राजस्व वसूली का ब्योरा (करोड़ रु में)
विभाग लक्ष्य वसूली उपलब्धि
वाणिज्यकर 15500.50 4814.90 31.06%
खान भूतत्व 8508.66 2012.38 23.65%
उत्पाद 1600.00 316.40 19.77%
परिवहन 1500.00 363.09 24.21%
निबंधन 900.00 270.16 30.02%
भू-राजस्व 400.00 37.08 9.27%
पहले तीन बार आ चुकी है ऐसी स्थिति
2012-13 : विकास योजनाओं पर 16300 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य था. पैसों की कमी की वजह से बाद में इसे घटा कर 13774 करोड़ किया गया
2013-14 : विकास पर 16800 करोड़ के लक्ष्य को घटा कर 13795 करोड़ किया गया
2014-15 : विकास योजनाओं पर खर्च करने के लिए 18270 करोड़ के निर्धारित लक्ष्य को घटा कर 16128.75 करोड़ किया गया
उत्पाद, निबंधन व भू-राजस्व की स्थिति अधिक खराब
उत्पाद विभाग को पिछले साल अक्तूबर तक 563.95 करोड़ राजस्व मिला था. इस साल अक्तूबर तक सिर्फ 316.40 करोड़ ही मिले -निबंधन से सरकार को पिछले साल अक्तूबर तक 409.07 करोड़ मिले थे. इस साल अक्तूबर तक सिर्फ 270.16 करोड़ मिले
भू-राजस्व से पिछले साल अक्तूबर तक 94.43 करोड़ मिले थे. इस साल अब तक सिर्फ 37.08 करोड़ ही मिले
Prabhat Khabar Digital Desk
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