रांची. झारखंड में ग्रामीण विकास की आधारभूत संरचना के मामले में रामगढ़ जिला सबसे अग्रणी है, जबकि संताल परगना का साहिबगंज जिला सबसे पिछड़े स्थान पर है. इसकी जानकारी अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की विशेष रिपोर्ट में मिली है. इस रिपोर्ट का विषय ””””झारखंड में ग्रामीण बहुआयामी सुविधाओं का एक डेटा-आधारित विश्लेषण-2025”””” है. इसमें राज्य के ग्रामीण विकास की चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश की गयी है.
झारखंड देश के सबसे पिछड़े और वंचित राज्यों में से एक
इस रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता के मामले में झारखंड देश के सबसे पिछड़े और वंचित राज्यों में से एक है. ग्रामीण बहुआयामी नुकसान (डेप्रीवेशन) सूचकांक (आरडीआइ) के आधार पर झारखंड भारत का सातवां सबसे कमजोर राज्य है. यदि पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों और लद्दाख को हटा दिया जाये, तो झारखंड देश का सबसे पिछड़ा राज्य बनकर उभरता है. आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के लगभग 75.76% गांव ””””बहुआयामी रूप से वंचित”””” की श्रेणी में आते हैं. वहीं राष्ट्रीय औसत 47.81% के आसपास है. साहिबगंज जिला राज्य में सबसे अधिक वंचित है, जिसका आरडीआइ स्कोर 0.44 है. इसके बाद सिमडेगा, गुमला, गढ़वा और पश्चिमी सिंहभूम का स्थान आता है. रामगढ़ 0.17 स्कोर के साथ सबसे कम कमजोर जिले में शामिल है. लोहरदगा, रांची और धनबाद भी तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन करनेवाले जिलों में शामिल हैं.
उच्च माध्यमिक विद्यालयों की उपलब्धता अभी भी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में शिक्षा और बुनियादी ढांचा एक सकारात्मक पहलू के रूप में सामने आया है. राज्य ने प्राथमिक और मध्य विद्यालयों तक पहुंच सुनिश्चित करने के कई प्रयास किये हैं. हालांकि, उच्च माध्यमिक विद्यालयों की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती है. बुनियादी ढांचे के मामले में सड़कें और सार्वजनिक परिवहन की कमी भी ग्रामीण आबादी के लिए बड़ी समस्या है.
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