…तो क्या राजा पीटर ने नक्सलियों की मदद से दी थी गुरुजी को चुनावी शिकस्त?

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…तो क्या राजा पीटर ने नक्सलियों की मदद से दी थी गुरुजी को चुनावी शिकस्त?

रांची : रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड के आबकारी मंत्री रहे गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर की संलिप्तता की जांच चल रही है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने राजा पीटर को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है. उनकी गिरफ्तारी के बाद […]

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रांची : रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और झारखंड के आबकारी मंत्री रहे गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर की संलिप्तता की जांच चल रही है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने राजा पीटर को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है. उनकी गिरफ्तारी के बाद से दबी जुबान से यह सवाल उठने लगा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को हराने में कहीं नक्सलियों की भूमिका तो नहीं थी?

जदयू के दिवंगत विधायक की हत्या में भाकपा माओवादी के पूर्व जोनल कमांडर कुंदन पाहन समेत कई नक्सलीआरोपी हैं. इसी मामले में निर्दलीय विधायक रहे राजा पीटर की भी गिरफ्तारी इस ओर संकेत करते हैं कि नक्सलियों से उनके संबंध हैं. विधायक बनने से पहले राजा पीटर खूंटी, तमाड़ के सुदूर गांवों और जंगलों में सक्रिय रहा था. इसलिए नक्सलियों से उसके संबंधों को नकारा नहीं जा सकता.

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तमाड़ विधानसभा उपचुनाव में शिबू सोरेन की हार को कोई पचा नहीं पा रहा था. यह बात किसी के गले नहीं उतरी कि गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर जैसा एक व्यक्ति, जो जमशेदपुर में कई अपराध की सजा भुगत चुका है, शिबू सोरेन जैसी शख्सियत को हरा सकता है. वह भी बिना किसी प्रतिष्ठित पार्टी की मदद के. तब, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की झारखंड में सरकार हो और खुद दिशोम गुरु मुख्यमंत्री.

ज्ञात हो कि तमाड़ के विधायक रमेश सिंह मुंडा की 9 जुलाई, 2008 को नक्सलियों ने हत्या कर दी थी. विधायक के साथ नक्सलियों की गोलीबारी में उनके दो अंगरक्षक और एक छात्र की भी मौत हो गयी थी. हत्या का आरोप तत्कालीन नक्सली जोनल कमांडर कुंदन पाहनऔर उसके दस्ते पर लगा. 14 मई, 2017 को कुंदन पाहन ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया.

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कुंदन पाहन को उस दिन हीरो की तरह पेश किया जा रहा था. रमेशसिंह मुंडा के बेटे विकास सिंह मुंडा ने इसका विरोध किया. उन्होंने अपने पिता की हत्या के मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की. अपनी मांग मनवाने के लिए उन्होंने धरना दिया, अनशन किया आैर अंतत: सरकार ने उच्चस्तरीय जांच का आश्वासन दिया और विकास ने अनशन और धरना खत्म कर दिया.

बाद में विकास सिंह मुंडा ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर मामले की सीबीआई या एनआईए से जांच कराने का आग्रह किया. गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए ने छह जून, 2017 को मामले की जांच शुरू की. जांच के क्रम में ही एनआईए ने राजा पीटर और उनके कुछ करीबी लोगों को गिरफ्तार किया है. यह भी इस ओर संकेत करता है कि राजा पीटर के नक्सलियों से सांठगांठ हैं.

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राजा पीटर की नक्सलियों से सांठगांठ के बारे में पूरी जानकारी जुटाने के लिए एनआइए ने राजा पीटर के करीबी सुनील सोनार को हिरासत में लिया है. उससे भी पूछताछ हो रही है. दूसरी तरफ, जिस दिन रमेश सिंह मुंडा की हत्या हुई, उस दिन उनकी सुरक्षा में तैनात रहे शेषनाथ सिंह खरवार को भी एनआईए ने गिरफ्तार किया है. दोनों से धुर्वा स्थित एसटीएफ परिसर में पूछताछ की जा रही है.

शेषनाथ ने रमेश सिंह मुंडा की गतिविधियों की जानकारी नक्सलियों को दी थी. शेषनाथ द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर ही नक्सलियों ने मुंडा की हत्या का प्लान बनाया और उनकी हत्या की. आश्चर्यजनक रूप से जिस दिन मुंडा की हत्या की गयी, उनका सुरक्षाकर्मी होने के बावजूद वह बच गया, जबकि दो अंगरक्षक और एक छात्र की मौत हो गयी.

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