ग्लॉकोविजन ने दिलायी पहचान : रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को राष्ट्रीय मंच पर द्वितीय पुरस्कार

Updated at : 26 Mar 2026 11:31 PM (IST)
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ग्लॉकोविजन ने दिलायी पहचान : रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को राष्ट्रीय मंच पर द्वितीय पुरस्कार

ग्लॉकोविजन ने दिलायी पहचान : रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को राष्ट्रीय मंच पर द्वितीय पुरस्कार

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बीआइटी मेसरा में आयोजित इनोवेशन पिच में 21 हजार का मिला सम्मान चितरपुर. रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. छात्रा जिगीशा दीक्षा और छात्र मुकेश बाउरी ने अपने एआइ आधारित हेल्थकेयर आइडिया ग्लॉकोविजन के जरिए बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा में आयोजित वेलोसिटी इंटरनेशनल वीमेंस डे इनोवेशन पिच इवेंट में द्वितीय स्थान प्राप्त कर 21,000 का पुरस्कार जीता. इस उपलब्धि से कॉलेज सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. कार्यक्रम का आयोजन गूगल डेवलपर ग्रुप, रांची ने किया था. इसमें विभिन्न संस्थानों की टीमों ने अपने नवाचारी आइडिया प्रस्तुत किया. जिगीशा दीक्षा ने मंच पर ग्लॉकोविजन का प्रभावशाली प्रेजेंटेशन देते हुए बताया कि यह प्रोजेक्ट ग्लूकोमा जैसी गंभीर नेत्र बीमारी की शुरुआती पहचान पर केंद्रित है. ग्लूकोमा को साइलेंट थीफ ऑफ साइट कहा जाता है. इसके लक्षण देर से सामने आते हैं. ऐसे में एआइ तकनीक के जरिए रेटिनल इमेज का विश्लेषण कर प्रारंभिक स्तर पर ही जोखिम का पता लगाया जा सकता है. मुकेश बाउरी ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस सिस्टम में कंप्यूटर विजन और डीप लर्निंग का उपयोग किया गया है. एआइ मॉडल सीएनएन आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो ऑप्टिक नर्व के पैटर्न का विश्लेषण कर बीमारी के संकेतों की पहचान करता है. कॉलेज की प्राचार्या डॉ. श्रावणी रॉय ने छात्रों की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह तकनीक के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का उत्कृष्ट उदाहरण है. उप प्राचार्य डॉ नजमुल इस्लाम ने इसे छात्रों की मेहनत और नवाचार की सोच का परिणाम बताया. आइआइसी प्रमुख डॉ अरुणाभा दत्ता और सीएसइ विभागाध्यक्ष असीम कुमार महतो ने भी इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया. छात्रों के अनुसार, ग्लॉकोविजन अभी प्रोटोटाइप चरण में है. भविष्य में इसे और विकसित कर पायलट परीक्षण और क्लिनिकल वैलिडेशन के लिए तैयार किया जायेगा. यह प्रोजेक्ट न सिर्फ एक आइडिया है, बल्कि भविष्य में हेल्थ-टेक स्टार्टअप के रूप में उभरकर एआइ के जरिए नेत्र जांच को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है.

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SAROJ TIWARY

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