Jharkhand News:कोरोना काल में बन रहा अस्पताल आज भी अधूरा, दो साल बाद भी इलाज के लिए भटक रहे हैं 42 पंचायतों के लोग

Published by : Pritish Sahay Updated At : 28 Oct 2024 5:12 PM

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Jharkhand News: पतरातू में कोरोना काल से मरीजों के लिए बन रहा अस्पताल आज भी अधूरा है. प्री फैब्रिकेटेड अस्पताल को करीब 7.50 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है, लेकिन इसका निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया है.

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Jharkhand News: रामगढ़ (पतरातू) ,अजय तिवारी: पतरातू प्रखंड परिसर में बन रहा प्री फैब्रिकेटेड अस्पताल का निर्माण आज भी पूरा नहीं हुआ है. वैश्विक महामारी कोरोना काल के दौरान ही अस्पताल का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन आज भी इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया है. बता दें, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं की कमी को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक सुविधायुक्त अस्पताल के निर्माण के लिए योजना तैयार की थी. इसका शिलान्यास 15 नवंबर 2022 को किया गया था. इसे 6 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन आज 2 साल बीतने के बाद भी निर्माण अधूरा है. इस अस्पताल के निर्माण का मुख्य उद्देश्य था कि यहां अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ मरीजों का इलाज किया जा सके. अगर अस्पताल का काम पूरा हो जाता तो इससे 42 पंचायतों के लोगों को काफी राहत मिलती. लोगों का कहना है कि अस्पताल नहीं बनने का सबसे बड़ा कारण प्रशासनिक उदासीनता के साथ-साथ कई विवादास्पद मामले हैं.

50 बेड की होगी सुविधा

प्रखंड मुख्यालय परिसर में धीमी गति से बन रहे अस्पताल में मरीजों के लिए 50 बेड की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. अस्पताल के निर्माण में 7 करोड़ 50 लख रुपए खर्च किए जा रहे हैं. इस अस्पताल में मरीजों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित नर्स, ड्रेसर, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे रूम आदि की सुविधा होगी. हालांकि फिलहाल निर्माण अधूरा है और सुविधाओं की घोर कमी है. इन सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र के गरीब और सामान्य मरीजों को रांची, रामगढ़ के अलावा अन्य शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ रहा है.

अस्पताल बनने के बाद 42 पंचायत के ग्रामीणों को मिलेगा लाभ

प्रखंड मुख्यालय परिसर में जिस उद्देश्य के लिए अस्पताल बनाया जा रहा है, वो पूरा होता नहीं दिख रहा है. हालांकि अस्पताल का निर्माण पूरा हो जाने से पतरातू प्रखंड के 42 पंचायत के हजारों ग्रामीण लाभान्वित होंगे. उन्हें सरकारी तौर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाज कराने की सुविधा होगी. साथ ही बीमारी होने की सूरत में उन्हें अन्य शहरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. इस अस्पताल में मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी.

स्वास्थ्य केंद्र पतरातू की हालत जर्जर

स्वास्थ्य केंद्र पतरातू का भवन जर्जर हालत में है. अस्पताल में मेडिकल सुविधा नाम मात्र की भी नहीं है. यहां आने वाले मरीजों दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया जाता है. सीएचसी के डॉक्टर यहां आने वाले अधिकांश मरीजों के रिम्स रेफर कर देते हैं. कई लोग तो रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. फैब्रिकेटेड अस्पताल बन जाने से भी यहां के लोगों को मेडिकल सुविधा में लाभ मिलता. लेकिन फेवीक्रेटेड अस्पताल का निर्माण समय पर पूरा नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है.

सिविल सर्जन ने कहा था छह महीने बाद भी नहीं हुआ काम पूरा

फैब्रिकेटेड अस्पताल भवन के संबंध में रामगढ़ सिविल सर्जन की ओर से बीते मार्च महीने में ही यह कहा गया था कि दो महीने बाद यह अस्पताल लोगों के सेवार्थ हैंड ओवर कर दिया जाएगा. लेकिन 6 माह बीत जाने के बाद भी इस अस्पताल का कार्य अधूरा पड़ा है. पुराने सामुदायिक भवन की स्थिति जर्जर होने के कारण पतरातू प्रखंड क्षेत्र से यहां पहुंचने वाले मरीजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

पतरातू अस्पताल उपेक्षा का शिकार- प्रभु उरांव

पतरातू -बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी सह समाजसेवी प्रभु उरांव ने कहा की बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के तीनों प्रखंडों से पतरातू प्रखंड सबसे बड़ा प्रखंड व अंचल है. उन्होंने बताया कि पतरातू प्रखंड की जनसंख्या लगभग करीब साढ़े 5 लाख के करीब है. इसके बावजूद प्रखंड का सीएचसी अस्पताल में इलाज की कोई सुविधा नहीं है. साल 2009 में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही की ओर से प्रखंड परिसर पर 50 बेड के नए अस्पताल का आधारशिला रखी गई थी. भूमि पूजन भी किया गया था.

2009 से अब तक चार बार विधानसभा व लोकसभा का चुनाव भी हुआ. लेकिन अब तक यह अस्पताल पूर्ण रूप से तैयार नहीं हो सका. विधायक और सांसद ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया. इतने बड़े प्रखण्ड के सीएचसी अस्पताल में ब्लड, एक्सरे आदि की भी व्यवस्था नहीं है. प्रखंड के मरीजों को जांच के लिए बाहर जाना होता है. प्रखंड चिकित्सालय रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है.2022 से बन रहा प्री फेब्रिकेटेड अस्पताल भी अब तक नहीं बन सका है. उन्होंने सरकार से मांग किया है कि सुविधाओं से लैस अस्पताल का निर्माण अति शीघ्र कराया जाए ताकि दूर दराज के ग्रामीणों को बाहर का चक्कर न लगाना पड़े.

अभी तक फेवीक्रेटेड अस्पताल चालू नहीं होना चिंताजनक मनमोहन प्रसाद गुप्ता

पतरातू क्षेत्र के व्यवसायी मनमोहन प्रसाद गुप्ता ने कहा कि पतरातू ब्लॉक परिसर में बन रहे प्री फैब्रिकेटेड अस्पताल जो कोरोना काल के समय ही पूरा हो जाना चाहिए था. परंतु अभी तक निर्माण पूरा नहीं किया जाना चिंताजनक है. उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल का निर्माण पूरा की जाए.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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