दार्जिलिंग में भू-स्खलन का खतरा बरकरार, पीड़ित परिवार को 50 हजार की मदद, पर्यटकों से यात्रा टालने की अपील

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राहत शिविर में रह रहे लोगों में राहत सामग्री बांटते आपदा मोचन बल के जवान और भू-स्खलन से पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपए का चेक सौंपते अधिकारी.

राहत शिविर में रह रहे लोगों में राहत सामग्री बांटते आपदा मोचन बल के जवान और भू-स्खलन से पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपए का चेक सौंपते अधिकारी.

Darjeeling Landslide Update: मौसम विभाग की चेतावनी ने दार्जिलिंग की चिंता बढ़ा दी है. पहाड़ी पर्यटन स्थल पर भू-स्खलन का खतरा अभी टला नहीं है. एनएच-55 को आंशिक रूप से छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया है, लेकिन पूरी तरह से मलबा हटाने में अभी समय लग सकता है. पढ़ें डिटेल रिपोर्ट.

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Darjeeling Landslide Update: पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दार्जिलिंग की पहाड़ियों पर लगातार वर्षा की वजह से 12 जुलाई को भी भू-स्खलन का खतरा बना हुआ है. पिछले 24 घंटे में मिरिक, सुखिया पोखरी और घूम के पास कई जगहों पर पहाड़ से मलबा गिरने की खबर है. इस बीच राहत कार्य में तेजी आयी है. तिनधरिया में क्षतिग्रस्त घर के परिवार को तत्काल 50 हजार रुपए की सहायता दी गयी है. अन्य प्रभावित परिवारों का सर्वे जारी है.

मिरिक के शिविरों में पहुंची राहत सामग्री

प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) द्वारा भू-स्खलन प्रभावित परिवारों में कंबल, राशन किट और भोजन का वितरण किया जा रहा है. साथ में मेडिकल कैंप में डॉक्टर पीड़ित परिवारों के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं. राहत शिविरों में भोजन, पानी, दवा और जरूरी सामान की व्यवस्था की गयी है. 24 घंटे डॉक्टरों की टीम भी काम कर रही है.

सड़क और रेल की स्थिति

तिनधरिया में बंद राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-55) को आंशिक रूप से खोल दिया गया है. पीडब्ल्यूडी और सेना की टीमों ने रात भर काम करके एक लेन से हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू करवायी है. भारी वाहनों के लिए रास्ता अब भी बंद है. मिरिक-सुखिया पोखरी मार्ग पर 2 जगह सड़क धंसने से यातायात प्रभावित है. सुरक्षा कारणों से दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे यानी टॉय ट्रेन सेवा आज भी स्थगित रही.

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मिरिक, कलिम्पोंग और नागराकाटा में एनडीआरएफ तैनात

NDRF की 3 टीमें मिरिक, कलिम्पोंग और नागराकाटा में राहत कार्य कर रही हैं. जिला प्रशासन के अनुसार, अब तक 280 लोगों को सुरक्षित निकालकर मिरिक, कलिम्पोंग और सुखिया पोखरी में बनाये गये 4 राहत शिविरों में रखा गया है. शिविरों में भोजन, पानी, दवा और कंबल की व्यवस्था की गयी है.

पर्यटकों से अनावश्यक यात्रा टालने की अपील

IMD ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर रखा है. अगले 24 घंटे में 150 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है. इसी वजह से भू-स्खलन की आशंका बनी हुई है. जिलाधिकारी ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों के किनारे और ढलान वाले इलाकों में न जाएं. पर्यटकों से भी अनावश्यक यात्रा टालने की अपील की गयी है.

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24 घंटे काम कर रहा है हेल्पलाइन

दार्जिलिंग पुलिस ने लोगों की सहूलियत के लिए हेल्पलाइन नंबर +91 91478 89078 जारी किया गया है. यह हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे काम कर रहा है. प्रशासन ने कहा है कि मौसम साफ होते ही सड़कों को पूरी तरह बहाल करने का काम युद्धस्तर पर होगा.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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