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1973 में पहली बार भुरकुंडा आये थे गुरुजी

Updated at : 04 Aug 2025 9:58 PM (IST)
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1973 में पहली बार भुरकुंडा आये थे गुरुजी

र्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का भुरकुंडा कोयलांचल क्षेत्र से भी काफी गहरा संबंध रहा है.

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कुमार आलोक. 4बीएचयू0008-जिंदल के उद्घाटन कार्यक्रम में भोजन करते शिबू सोरेन, अर्जुन मुंडा व सुदेश महतो. भुरकुंडा. पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का भुरकुंडा कोयलांचल क्षेत्र से भी काफी गहरा संबंध रहा है. अपनी पार्टी के आरंभिक काल में संगठन विस्तार को लेकर वे पहली बार यहां 1973 में पहुंचे थे. पुरानी यादों को सहेजते हुए चिकोर निवासी टिकेश्वर महतो बताते हैं कि बिरसा चौक के पांडेय मुंडा होटल में वे आये थे. यहां आयोजित मीटिंग को उन्होंने संबोधित किया था. अपनी पार्टी की खासियत बताते हुए उन्होंने लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी. इसके बाद धीरे-धीरे उनकी पार्टी का जनाधार बढ़ने लगा. तब 1981 में उन्होंने संगठन को पार्टी के सिद्धांतों के अनुरूप चलाने के लिए टिकेश्वर महतो को प्रखंड अध्यक्ष मनोनीत किया. इसके कुछ दिनों के बाद ही भुरकुंडा के नागेश्वर मैदान में पार्टी की एक बड़ी सभा की गयी. जिसे संबोधित करते हुए उन्होंने अलग राज्य की मांग बुलंद की थी. 1984 में बिरला फैक्ट्री के बाहर लगे उनके पार्टी के झंडे को जब किसी के द्वारा उखाड़ दिया गया था, तब वे बेहद क्रोधित हो उठे. यहां पहुंचकर झंडा उखाड़ने वाले के खिलाफ केस दर्ज कराया था. लेकिन कंपनी ने उलटा दांव खेलते हुए प्रखंड अध्यक्ष टिकेश्वर महतो को ही जेल भिजवा दिया. इसके बाद कई बार गुरुजी इस क्षेत्र में आये. उरीमारी, ग्लास फैक्ट्री, भुरकुंडा थाना मैदान के कार्यक्रम में पहुंचे. इसके अलावा 2011 में जिंदल प्लांट के उदघाटन समारोह में शरीक हुए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

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