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लीड..राम..डीएलएसए सचिव ने बसंतपुर वाशरी का निरीक्षण किया,

Updated at : 27 Jul 2025 11:04 PM (IST)
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लीड..राम..डीएलएसए सचिव ने बसंतपुर वाशरी का निरीक्षण किया,

जिले के तापिन बसंतपुर गांव में प्रस्तावित नई कोल वाशरी को लेकर ग्रामीणों की चिंताओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है.

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हेडिंग…ग्रामीणों से प्रदूषण की समस्या से अवगत हुए ग्रामीणों ने प्रदूषण से बचाव को लेकर नयी वाशरी को पुराने वाशरी के पास खोलने की बात रखी फोटो 27 केदला 01 ग्रामीण से बात करते सचिव फोटो 27 केदला 02 बांसुरी के निरीक्षण करते सचिव वकील चौहान, केदला तापिन बसंतपुर कोल वाशरी से प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, डीएलएसए सचिव ने किया स्थल निरीक्षण जिले के तापिन बसंतपुर गांव में प्रस्तावित नई कोल वाशरी को लेकर ग्रामीणों की चिंताओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है. प्रदूषण से संबंधित जनहित याचिका (पीआइएल) की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) रामगढ़ के सचिव को स्थल निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. इसी क्रम में रविवार को डीएलएसए सचिव अनिल कुमार ने बसंतपुर गांव का दौरा किया और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. ग्रामीणों की चिंता: प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट बसंतपुर गांव के ग्रामीणों ने सचिव को बताया कि कोल वाशरी गांव के बीचोबीच सिमर टोला के पास खोली जा रही है, जिससे गांव की लगभग 15,000 की आबादी को गंभीर प्रदूषण का सामना करना पड़ेगा. ग्रामीणों ने कहा कि पहले से चल रही वाशरी, जो गांव से कुछ दूरी पर स्थित है, उससे भी ध्वनि और वायु प्रदूषण फैल रहा है. कई ग्रामीणों को श्वसन संबंधी बीमारियां हो चुकी हैं और कुछ की मृत्यु भी हो चुकी है. ग्रामीणों की मांग है कि नई वाशरी को पुराने वाशरी के पास स्थानांतरित किया जाये, ताकि गांव के बीच में प्रदूषण न फैले. ग्राम सभा में विरोध ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम सभा में भी नयी वाशरी के स्थान को लेकर विरोध दर्ज किया गया था. उनका कहना है कि अगर वाशरी पुराने स्थान के पास बनायी जाती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन गांव के बीच में वाशरी खोलना न तो पर्यावरणीय दृष्टिकोण से उचित है और न ही सामाजिक रूप से स्वीकार्य. सीसीएल प्रबंधन का पक्ष मौके पर उपस्थित सीसीएल प्रबंधन ने डीएलएसए सचिव के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वाशरी के लिए 17 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गयी है और रैयतों को इसके बदले नौकरी दी जा चुकी है. प्रबंधन ने दावा किया कि नयी वाशरी से कोयला परिवहन कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से किया जायेगा, जिससे प्रदूषण की मात्रा शून्य रहेगी. साथ ही, वाशरी से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर कार्य जारी है. निरीक्षण के दौरान सामने आयी समस्याएं डीएलएसए सचिव ने ग्रामीणों के साथ मिलकर वाशरी स्थल का निरीक्षण किया. ग्रामीणों ने बताया कि मेन प्लांट के पास सड़क पर कीचड़ जमा है, जिससे कामगारों को आने-जाने में परेशानी होती है. प्रबंधन इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है. इस पर सीसीएल के पीओ ने बताया कि वैकल्पिक मार्ग पर काम चल रहा है और बारिश के कारण कीचड़ की समस्या उत्पन्न हुई है. पथ निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह समस्या दूर हो जायेगी. बुनियादी सुविधाओं की कमी ग्रामीणों ने सचिव को बताया कि सीसीएल द्वारा संचालित केदला बसंतपुर वाशरी परियोजना के अंतर्गत गांव में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है. गांव में बेहतर स्कूल, अस्पताल, सड़क और बिजली की व्यवस्था नहीं है. बिजली के तार और पोल जर्जर अवस्था में हैं. सचिव ने गांव के 10 लोगों से विभिन्न समस्याओं को नोट किया. आपसी सहमति से हो निर्णय : सचिव डीएलएसए सचिव अनिल कुमार ने कहा कि परियोजना से लोगों को रोजगार और अन्य लाभ मिल सकते हैं, लेकिन इसे शुरू करने से पहले ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच आपसी सहमति जरूरी है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की बातों को नोट किया गया है और रिपोर्ट को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा. उन्होंने सीसीएल प्रबंधन को ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने की सलाह दी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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