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जमीनदारी प्रथा समाप्त करने के लिए ग्रामीण गोलबंद

Updated at : 03 Feb 2019 7:18 AM (IST)
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जमीनदारी प्रथा समाप्त करने के लिए ग्रामीण गोलबंद

गोला : गोला प्रखंड के कोरांबे गांव के निमवाटोला में शनिवार को रैयत ग्रामीणों की बैठक हुई. बैठक में रैयतों ने मुंडा खूट कटीदार प्रथा को बंद कर सरकारी नियम के अनुसार भूमि को ऑनलाइन कराने की मांग की. ग्रामीणों ने बताया कि कोरांबे मौजा में पिछले कई वर्षों से जमीनदारी प्रथा कायम है. इसके […]

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गोला : गोला प्रखंड के कोरांबे गांव के निमवाटोला में शनिवार को रैयत ग्रामीणों की बैठक हुई. बैठक में रैयतों ने मुंडा खूट कटीदार प्रथा को बंद कर सरकारी नियम के अनुसार भूमि को ऑनलाइन कराने की मांग की. ग्रामीणों ने बताया कि कोरांबे मौजा में पिछले कई वर्षों से जमीनदारी प्रथा कायम है. इसके कारण जमीन की खरीद-बिक्री करने पर जमीनदार द्वारा लगान लिया जाता है.

इसके बदले में रसीद मिलती है, लेकिन सरकारी कार्यों में इस रसीद की कोई मान्यता नहीं दी जाती है. सरकारी लाभ से रैयतों को वंचित होना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने जमीनदार पर एक ही प्लॉट की भूमि को एक से अधिक लोगों के पास बेचने का भी आरोप लगाया. ग्रामीणों ने बताया कि इस मौजा में जमीनदार के नाम कुल तीन हजार 386 एकड़ 68 डिसमिल भूमि है. पूरी भूमि को जमीनदार ठाकुर रविशंकर सिंह ने अपने पिता स्व ठाकुर कुंज किशोर सिंह के नाम ऑनलाइन करा लिया है.

जबकि सर्वे में भूमि को खरीदार रैयतों के नाम चढ़ाया गया है. ग्रामीणों ने इस व्यवस्था के तहत जमीनदार द्वारा बेची गयी भूमि को खरीदारों के नाम ऑनलाइन करने एवं सरकारी नियम के तहत रसीद निर्गत करने की मांग की. ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, भू-राजस्व मंत्री, स्थानीय विधायक, मुख्य सचिव व उपायुक्त को पत्र भेजने का निर्णय लिया है. बैठक में बासुदेव सिंह मुंडा, दिनेश्वर बेदिया, संजय प्रसाद, सुकदेव बेदिया, दिनेश रजवार, महेश्वर मांझी, बालदेव मांझी, अनूप प्रसाद, भीषम बेदिया, श्रीपद बेदिया, पंकज कुमार, नरेश महतो, पंचम रविदास, सुखराम मांझी, बीरबल नायक, भोला बेदिया, शंकर बेदिया, अभय कुमार, आनंद प्रसाद मौजूद थे. गौरतलब हो कि इस मामले को लेकर 25 जनवरी को ग्रामीणों ने सीओ कार्यालय का घेराव किया था.

मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना का नहीं मिलेगा लाभ : ग्रामीणों का कहना था कि सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाओं को लागू की गयी है. लेकिन कोरांबे में जमीनदारी प्रथा कायम रहने के कारण इस योजना का लाभ यहां के लोगों को नहीं मिलेगा. फिलहाल मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना व केंद्र सरकार द्वारा बजट में पारित किसानों को सहायता राशि से वंचित होना पड़ेगा.
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