मैक्लुस्कीगंज : पहचान बचाने के लिए जद्दोजहद

Updated at : 25 Jun 2014 8:08 AM (IST)
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मैक्लुस्कीगंज : पहचान बचाने के लिए जद्दोजहद

विकास के लिए शेयर जारी किया था पंच वर्षीय योजना बनाकर विकास कार्य की नींव भारत में मैक्लुस्कीगंज से ही शुरू हुई थी. इसके लिए एंग्लो इंडियनों ने क्लोनाइजेशन सोसाइटी बनाकर 1946 में शेयर जारी किया था. इसकी सदस्यता शुल्क पांच रुपये थी. वहीं एक शेयर की कीमत 12़ 08 रुपये रखी गयी थी. इसी […]

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विकास के लिए शेयर जारी किया था

पंच वर्षीय योजना बनाकर विकास कार्य की नींव भारत में मैक्लुस्कीगंज से ही शुरू हुई थी. इसके लिए एंग्लो इंडियनों ने क्लोनाइजेशन सोसाइटी बनाकर 1946 में शेयर जारी किया था. इसकी सदस्यता शुल्क पांच रुपये थी. वहीं एक शेयर की कीमत 12़ 08 रुपये रखी गयी थी. इसी कमाई से विकास का काम होता था. उस समय मैक्लुस्कीगंज में अस्पताल, चिकित्सक, पोस्ट ऑफिस, थाना, रेलवे स्टेशन, डांस क्लब, बेकरी कारखाना, ग्रामो फोन की दुकान, डिपार्टमेंटल स्टोर, बग्घी वाहन, अस्तबल, गोल्फ, फुटबॉल व क्रिकेट टीम, सभी तरह के फलों के बागान व नर्सरी खोली गयी.

यहां 1962 में ही बिजली आ गयी थी. मैक्लुस्कीगंज में पहले औसतन साल में 150 दिन बारिश होती थी. उस समय यहां प्रत्येक दिन सुबह में ठंड, दोपहर में हल्की गरमी, शाम में बरसात और रात में बसंत ऋतु का आनंद मिलता था. 1990 तक यहां का अधिकतम तापमान मई में 35 डिग्री सेल्सियस व दिसंबर में न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस रहता था. 80 किलोमीटर की परिधि में घने जंगल थे. नदी में सालों भर पानी रहता था. पहाड़ियों में कई जंगली जानवर रहते थे.

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