छावनी परिषद की बैठक में बिना संजीत को हटाये अनमोल का हुआ चयन

Updated at : 30 Mar 2018 4:57 AM (IST)
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छावनी परिषद की बैठक में बिना संजीत को हटाये अनमोल का हुआ चयन

मिनट में छोटू सिंह पर अविश्वास प्रस्ताव पर हुई कार्रवाई का जिक्र नहीं. रामगढ़ : छावनी परिषद की 26 मार्च को हुई बैठक में परिषद के उपाध्यक्ष संजीत सिंह उर्फ छोटू सिंह को हटाये बिना ही अनमोल सिंह का चयन उपाध्यक्ष के रूप में किया गया. यह बात आज परिषद सदस्यों को मिली बैठक की […]

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मिनट में छोटू सिंह पर अविश्वास प्रस्ताव पर हुई कार्रवाई का जिक्र नहीं.
रामगढ़ : छावनी परिषद की 26 मार्च को हुई बैठक में परिषद के उपाध्यक्ष संजीत सिंह उर्फ छोटू सिंह को हटाये बिना ही अनमोल सिंह का चयन उपाध्यक्ष के रूप में किया गया. यह बात आज परिषद सदस्यों को मिली बैठक की कार्रवाई के मिनट से सामने आयी. 26 मार्च को नाटकीय तरीके से संजीत सिंह उर्फ छोटू सिंह को हटाने व अनमोल सिंह के उपाध्यक्ष चुनने की घोषणा की गयी थी.
बैठक के बाद सीइओ सपन कुमार ने पत्रकारों को जानकारी दी थी कि निजी कारणों से संजीत सिंह उर्फ छोटू सिंह ने अपना इस्तीफा दिया. फिर उपाध्यक्ष के रूप में अनमोल सिंह का चयन किया गया. लेकिन बाद में छोटू सिंह ने बयान दिया कि गलत तरीके से छावनी अधिनियम 2006 का उल्लंघन करते हुए टेबल एजेंडे के माध्यम से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया.
उनके विरोध को दरकिनार करते हुए अनमोल सिंह का चयन किया गया है. संजीत सिंह ने इस कार्रवाई को छावनी अधिनियम की धारा 20 की उपधारा तीन का उल्लंघन बताते हुए परिषद के सीइओ समेत परिषद अध्यक्ष, रक्षा संपदा के उच्चाधिकारी समेत मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी को आवेदन दिया था. न्याय न मिलने पर न्यायालय की शरण लेने की बात कही गयी है.
परिषद के सदस्यों को बैठक के दिये गये मिनट में टेबल ऐजेंडा नंबर एक के संबंध में लिये गये निर्णय पर लिखा गया है कि परिषद के चार सदस्यों ने आवेदन देते हुए अविश्वास प्रस्ताव दिया. कहा कि वे संजीत सिंह की कार्यशैली से सहमत नहीं है. इसके बाद सीधे परिषद उपाध्यक्ष के चुनाव की कार्रवाई मिनट में दर्ज है.
लिखा गया है कि वार्ड सदस्य राजेंद्र नायक ने उपाध्यक्ष पद के लिए अनमोल सिंह के नाम का प्रस्ताव किया, जिसका समर्थन कैलाश मुंडा ने किया. बेबी प्रसाद व पुरनी देवी ने भी अपना समर्थन अनमोल सिंह को दिया.
अनमोल सिंह उपाध्यक्ष चुने गये तथा अगली बोर्ड बैठक में उन्हें उपाध्यक्ष पद की शपथ दिलायी जायेगी. लेकिन मिनट में कहीं भी संजीत सिंह को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई का जिक्र नहीं है. जानकारों के मुताबिक यह तकनीकी रूप से गलत है. पहले उपाध्यक्ष को हटाया जाता, तब नये उपाध्यक्ष का चयन किया जाता.
छावनी एक्ट के उल्लंघन से बनी हास्यास्पद स्थिति : पंकज
छावनी अधिनियम 2006 के उल्लंघन से उपाध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर हास्यास्पद स्थिति बन गयी है. वर्तमान में परिषद के दो-दो उपाध्यक्ष हो गये हैं.
उक्त बातें परिषद के पूर्व वार्ड सदस्य पंकज प्रसाद तिवारी व रामगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के नागरिक सुविधा समिति के सभापति पंकज प्रसाद तिवारी ने कही. उन्होंने कहा कि ऐसा सीइओ द्वारा छावनी एक्ट के उल्लंघन तथा मनमानी ढंग से कार्य करने की वजह से पैदा हुई है.
श्री तिवारी ने कहा कि पहले एक्ट का उल्लंघन करते हुए गलत तरीके से बैठक में टेबल एजेंडा के माध्यम से अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है. फिर उपाध्यक्ष को हटाये नये अध्यक्ष का चुनाव कर लिया जाता है. उन्होंने कहा कि छावनी परिषद में पूर्व में ऐसी स्थिति कभी परिषद के इतिहास में पैदा नहीं हुई थी.
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