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परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती, 10 हजार से अधिक लोगों ने भंडारे में खाया खाना

Paramahansa Yogananda 133 Birth Anniversary: योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया (YSS) ने अपने संस्थापक परमहंस योगानन्द का 133 वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया. समारोह का शुभारंभ सत्संग के साथ किया गया, जिसके सीधे प्रसारण में देश-विदेश से हजारों भक्त जुड़े. वाईएसएस की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया था. साथ ही, जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया गया.

Paramahansa Yogananda 133 Birth Anniversary: योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया (YSS), रांची ने अपने संस्थापक, परमहंस योगानन्द का 133 वां जन्मोत्सव मनाया गया. समारोह का शुभारंभ एक विशेष समूह ध्यान और स्वामी श्रद्धानन्द गिरि की ओर से गुरु: मौन ईश्वर की मुखर वाणी विषय पर एक सत्संग के साथ किया गया. कार्यक्रम का सीधा प्रसारण योगदा सत्संग ऑनलाइन ध्यान केन्द्र पर Zoom App के जरिए किया गया, जिसमें दुनियाभर से हजारों भक्त जुड़े. इसके बाद ब्रह्मचारी भास्करानन्द और कैवल्यानन्द की ओर से संचालित भजनों का उल्लासपूर्ण कीर्तन हुआ. शिव मंदिर में गुरु पूजा और यज्ञ सम्पन्न किया गया. दिन का मुख्य आकर्षण भक्तों के साथ-साथ रांची शहर और आस-पास के गांवों के लोगों के लिए एक भंडारा था. समारोह का समापन शाम को एक विशेष ध्यान के साथ हुआ.

हर साल धूम-धाम से मनाया जाता है परमहंस योगानंद का जन्म दिवस

योगानंद की ओर से स्थापित यह आध्यात्मिक संस्था हर वर्ष उनके जन्मोत्सव को ध्यान, कीर्तन और इस भण्डारे के साथ मनाती है. हर वर्ष की तरह इस साल भी स्थानीय लोगों और अन्य आगन्तुकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया. कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होकर देर शाम तक चला. आश्रम के द्वार पर लम्बी कतारें लगने लगीं.वाईएसएस के अनेक भक्तों ने उत्साहपूर्वक मेहमानों को खिचड़ी, चटनी और लड्डू का प्रसाद दिया. इस भण्डारे के माध्यम से लगभग 10000 से अधिक लोगों को गुरु प्रसाद ग्रहण किया.

जरूरतमंदों के बीच बांटे गए कंबल

दिसम्बर के महीने में आश्रम ने गुरुदेव के सम्मान में सेवा गतिविधियां आयोजित की गई थी, जिसमें अंगड़ा गांव के गरीब और जरूरतमंद निवासियों और रांची में कुष्ठ रोग से प्रभावित कॉलोनी (निर्मल आवास, मुदमा के पास) के लोगों को कम्बल वितरित किया गया. 2 जनवरी को, आश्रम ने रांची में कुष्ठ रोग से प्रभावित कॉलोनी के गरीब और जरूरतमंद निवासियों को भोजन उपलब्ध कराकर इन सेवा गतिविधियों को जारी रखा.

1917 में हुई थी YSS की स्थापना

वाईएसएस की स्थापना योगानंद ने 1917 में की थी. इसका मकसद भारत और पड़ोसी देशों में क्रिया योग सिखाना था. क्रियायोग एक पवित्र आध्यात्मिक विज्ञान है जो हजारों साल पहले भारत में उत्पन्न हुआ था.

Pritish Sahay
Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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