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सतर्कता ही मंकी पॉक्स से बचाव का एकमात्र उपाय

Updated at : 26 Aug 2024 9:27 PM (IST)
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सतर्कता ही मंकी पॉक्स से बचाव का एकमात्र उपाय

प्रेस कांफ्रेंस में सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार ने कहा

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मेदिनीनगर. मंकी पॉक्स कोरोना के जैसा वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है. इससे बचाव के लिए सतर्कता जरूरी है. लक्षणों की पहचान करना भी आवश्यक है. यह बातें पलामू सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कही. उन्होंने बताया कि मंकी पॉक्स कोरोना जैसा घातक नहीं है, फिर भी खतरनाक बीमारी है. समय रहते लक्षणों की पहचान कर पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि मंकी पॉक्स विश्व के 17 देशों में पांव पसार चुका है. हालांकि भारत में अभी तक एक भी केस सामने नहीं आया है. हेल्थ एक्सपर्ट लोगों को जागरूक कर रहे हैं. पलामू में भी लोगों को जागरूक किया जायेगा. मंकी पॉक्स वायरस से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है. मौके पर प्रभारी अस्पताल अधीक्षक डॉ आरके रंजन, महामारी विशेषज्ञ डॉ अनूप कुमार, डीपीएम सुमित श्रीवास्तव मौजूद थे.

क्या है लक्षण : सिविल सर्जन ने बताया कि मंकी पॉक्स वायरस के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति को बुखार, खांसी, त्वचा पर दाना निकलना, चेहरे, हाथ, पैर, हथेलियों एवं तलवे पर दाना निकलना, सिर दर्द, मांसपेशी में दर्द, कमर दर्द, थकान, गले में खराश प्रमुख लक्षण है.

सतर्कता व सावधानी जरूरी : वायरस से पीड़ित व्यक्ति से दूरी बनानी होगी. कोरोना वायरस की तरह ही इस वायरस से भी बचाव के लिए सतर्कता व सावधानी जरूरी है. सोशल डिस्टेंस का पालन, मास्क का उपयोग व हाथों की अच्छी तरफ सफाई करें.

एमएमसीएच में 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार

मंकी पॉक्स वायरस से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक तैयारी शुरू कर दी है. सिविल सर्जन ने बताया कि मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है. उन्होंने सोमवार को आइसोलेशन वार्ड का निरीक्षण किया. सभी बेड में ऑक्सीजन का कनेक्शन है. उन्होंने चिकित्सक व स्टाफ रूम को सुव्यवस्थित करने का निर्देश दिया. बताया कि आइसोलेशन वार्ड में मंकी पॉक्स से पीड़ित मरीजों का भर्ती कर इलाज किया जायेगा. वार्ड में सभी आवश्यक सुविधाएं एवं दवा उपलब्ध रहेगी. सीएस ने बताया कि हुसैनाबाद व छतरपुर अनुमंडलीय अस्पताल में पांच-पांच एवं सभी सीएचसी में तीन-तीन बेड सुरक्षित रखा गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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