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जर्जर हो रहा एक करोड़ से बना छात्रावास 10 साल के बाद भी नहीं हो सका हैंडओवर

Updated at : 18 Nov 2024 4:46 PM (IST)
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जर्जर हो रहा एक करोड़ से बना छात्रावास 10 साल के बाद भी नहीं हो सका हैंडओवर

राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में निर्मित 100 बेड का दो छात्रावास 10 वर्षों के बाद भी चालू नहीं हो सका है.

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छतरपुर. राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में निर्मित 100 बेड का दो छात्रावास 10 वर्षों के बाद भी चालू नहीं हो सका है. एक करोड़ छह लाख रुपये की लागत से बने इस छात्रावास में कुछ लोग अवैध तरीके से कब्जा कर अपना बसेरा डाल दिया है. अतिसुदूर और नक्सल प्रभावित गांवों के आदिम जनजाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए उक्त छात्रावास का निर्माण 2014 में शुरू कराया था. 53–53 लाख रुपये के प्राक्कलन से लड़कियों के लिए 50 बेड की और लड़कों के लिए 50 बेड का छात्रावास बनाया गया था. इस दौरान आधा अधूरा काम किया गया. छात्रावास भवन में न तो शौचालय का निर्माण कराया गया और न ही बिजली पानी की व्यवस्था की गयी है. बताया जाता है कि स्कूल को हैंडओवर नहीं किया गया है. जबकि उक्त भवन को तत्कालीन संवेदक के द्वारा आधा अधूरा निर्माण कराकर पूरी राशि निकाल ली गयी. पुनः 2023 में 50 लाख रुपये की लागत से दोनों छात्रावास में चहारदीवारी, गार्ड शेड, पीसीसी पथ और रंग-रोगन का कार्य किया गया. लोगों का कहना है कि उक्त दोनों छात्रावास बच्चों की सुविधा के लिए नहीं बनायी गयी, बल्कि ठेकेदारी के लिए निर्माण किया गया. जिस पर बार-बार बिना उपयोग के आम जन के पैसों का इस्तेमाल लूटने के लिए किया जा रहा है. प्रधानाध्यापक अजीत कुमार साहू ने कहा कि छात्रावास भवन अब तक हैंडओवर नहीं किया गया मौखिक रूप से देख-रेख करने के लिए कहा गया है. पूर्व विधायक सुधा चौधरी ने कहा कि उनके द्वारा अथक प्रयास से आदिम जनजाति के बच्चों के लिए छात्रावास बनाया था. विडंबना है कि आज तक उक्त छात्रावास बच्चों को नहीं दिया गया. इसके लिए वे कल्याण पदाधिकारी से बात कर अविलंब चालू कराने की दिशा में पहल करेंगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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