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जब संविधान सभा में वाइस प्रेंसिडेंट से बोले गोपा बाबू- इसका तरीका होता है, सर

Updated at : 26 Jan 2025 4:35 PM (IST)
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amiyo kumar ghosh gopa babu in constituent assembly

Republic Day 2025: गणतंत्र दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर आज हम अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू के संविधान सभा में दिए उस भाषण के बारे में बता रहे हैं, जिसमें उन्होंने कुटीर उद्योग और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पेश किये गये 2 संशोधनों में से एक का विरोध किया था.

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Republic Day 2025: पलामू के रहने वाले अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू संविधानसभा के सदस्य थे. संविधान सभा में वाइस प्रेसिडेंट ने अचानक आर्टिकल 4 से जुड़े संशोधनों पर चर्चा शुरू करवाई, तो इसका गोपा बाबू ने विरोध किया. वाइस प्रेसिडेंट ने उन्हें समझाया कि सदन का समय बचाने के लिए वह एक फैसला ले रहे हैं, इस पर अमिय बाबू ने कहा कि इसका भी एक तरीका होता है. 18 नवंबर 1948 को संविधान सभा में आर्टिकल 4 पर संशोधन पेश करने की जब तैयारी हुई, तो अमिय कुमार घोष और वाइस प्रेसिडेंट डॉ एचसी मुखर्जी के बीच क्या बातें हुईं, इसके बारे में आपको बाद में बताते हैं. पहले यह बता देते हैं कि इस दिन गोपा बाबू के अलावा और किन लोगों ने बहस में भाग लिया. अमिय कुमार घोष के अलावा नजीरुद्दीन अहमद, साहिब बहादुर महबूब अली बेग, एचवी कामत, सृजुत रोहिणी कुमार चौधरी, शिब्बन लाल सक्सेना, डॉ बीआर आंबेडकर, सेठ गोविंद दास, के संतनम, उपाध्यक्ष डॉ एचसी मुखर्जी, एम अनंतसयनम अयंगर, बी पोकर साहिब बहादुर, लोकनाथ मिश्र और महावीर त्यागी को भी बोलने का मौका मिला.

18 नवंबर 1948 को संविधान सभा में क्या बोले गोपा बाबू?

अब जान लीजिए कि 18 नवंबर 1948 को गोपा बाबू ने सदन में क्या कहा था. वाइस प्रेसिडेंट ने जब अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू को बोलने का मौका दिया, तो उन्होंने कहा कि सामान्य नियम है कि बहस क्रमवार तरीके से आगे बढ़े, लेकिन हम पार्ट 1 से सीधे पार्ट 4 पर आ रहे हैं. हमें पार्ट 2 और पार्ट 3 में कई संशोधन देने थे. हम उसकी तैयारी करके आए थे, लेकिन सदन सीधे पार्ट 4 के संशोधनों पर आ गया है. इससे हमारी समस्या बढ़ गई है. पार्ट 4 में हमारे पास कई संशोधन हैं.

वाइस प्रेसिडेंट ने अमिय कुमार घोष को टोका

इस पर वाइस प्रेसिडेंट ने उन्हें टोकते हुए कहा, ‘आप इस बात को मानेंगे कि हमें सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाना चाहिए.’ इस पर अमिय बाबू ने कहा, ‘लेकिन इसका भी एक तरीका है, सर.’ वाइस प्रेसिडेंट ने अमिय बाबू को यह कहकर समझाने की कोशिश की, ‘आप मेरी इस बात से भी सहमत होंगे कि यह हाउस के हित में होगा कि जिन लोगों ने अमेंडमेंट्स (संशोधन) भेजे हैं, उन्हें ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्यों के साथ उस पर बहस करने और सहमति बनाने का मौका मिलना चाहिए. यह न केवल सदन के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि सदन के समय की भी बचत होगी. इसी वजह से हमने पार्ट 2 और पार्ट 3 को छोड़कर बहस को आगे बढ़ाने की सोची है. मुझे विश्वास है कि मेरे इस प्रस्ताव को पूरे सदन का समर्थन प्राप्त है.’

अमित कुमार घोष ने सदन को 3 बजे तक स्थगित करने की दी सलाह

इस पर अमिय कुमार घोष ने कहा, ‘सर, मैं आपसे निवेदन करता हूं कि अभी हाउस को स्थगित कर दिया जाए. 12 बजने वाले हैं. हम कुछ देर के विराम के बाद फिर 3 बजे बैठ सकते हैं.’ इस पर वाइस प्रेसिडेंट ने कहा, ‘मैं आपके इस प्रस्ताव पर विचार कर सकता हूं.’

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19 नवंबर 1948 की सुबह 10 बजे तक के लिए सदन स्थगित

अमिय कुमार घोष की इस बात के बाद काजी सैयद करीमुद्दीन, एम अनंतसयनम अयंगर, बी पोकर साहिब बहादुर, लोकनाथ मिश्र, महावीर त्यागी, ने भी अपनी बातें रखीं. सभी की बातें सुनने के बाद वाइस प्रेसिडेंट ने सदन की कार्यवाही 19 नवंबर 1948 को सुबह 10 बजे तक के लिए स्थगति कर दी.

23 नवंबर 1948 को संविधान में शामिल हुआ आर्टिक 32 और 33

23 नवंबर 1948 को संविधान सभा में आर्टिकल 32 और आर्टिकल 33 को संविधान में शामिल कर लिया गया. इसके बाद आर्टिकल 34 पर चर्चा शुरू हुई. चर्चा की शुरुआत महावीर त्यागी ने की. इसमें भी गोपा बाबू ने अपना पक्ष रखा. महावीर त्यागी ने संशोधन पेश किया. उन्होंने लंबा भाषण दिया और अपनी बात रखी. टीए रामलिंगम चेट्टियार ने अपने संशोधन में कुछ संशोधन करने की बात कही. इस पर वाइस प्रेसिडेंट ने उनसे पूछा, ‘क्या आप आर्टिकल में कुछ जोड़ना चाहते हैं, जो पहले ही स्वीकृत और पास हो चुका है?’

अमिय घोष ने टीए रामलिंगम चेट्टियार के प्रस्ताव का किया विरोध

टीए रामलिंगम चेट्टियार ने कहा कि अब इस आर्टिकल पर विचार किया जा रहा है. इस पर अमिय कुमार घोष ने कहा, ‘सर, गुप्ता नाथ सिंह ने ऐसा ही एक अमेंडमेंट पेश किया है, जो बिल्कुल वैसा ही है, जिस पर हम विचार करने जा रहे हैं. अमेंडमेंट नंबर 954.’ टीए रामलिंगम चेट्टियार बोले, ‘मैं जो प्रस्ताव लाने जा रहा हूं, वो मिस्टर त्यागी के संशोधन के बदले में है.’

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अमिय घोष बोले- नये क्लॉज 34-ए में नहीं है कोई नई बात

इस पर अमिय कुमार घोष ने कहा, ‘नया क्लॉज 34-ए, जिसे पेश करने की मांग की जा रहा है, वह बिल्कुल वही है. यह कहता है- राज्य सरकार को लघु उद्योगों को विकसित करने और गांवों को जितना संभव हो आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश करनी चाहिए.’

वाइस प्रेसिडेंट ने अमिय घोष से कहा- अपनी सीट पर बैठ जाएं

अमिय बाबू और चेट्टियार की बातों के बीच एक सदस्य ने वाइस प्रेसिडेंट को संबोधित करते हुए कहा, ‘क्या एक ही समय दो लोगों को सदन में बोलने की अनुमति दी गई है?’ इस पर वाइस प्रेसिडेंट बोले, ‘दो लोग नहीं बोल रहे हैं. आप गलती कर रहे हैं. मिस्टर घोष कृपया आप अपनी सीट पर बैठ जाएं.’ फिर वाइस प्रेसिडेंट ने चेट्टियार से मुखातिब होते हुए कहा, ‘मिस्टर चेट्टियार, क्या आपने अपना संशोधन पेश कर दिया है?’ टीए रामलिंगम चेट्टियार बोले, ‘यह अमेंडमेंट है, सर.’

अमिय बाबू ने महावीर त्यागी के अमेंडमेंट को शामिल करने का फिर किया विरोध

अब अमिय कुमार घोष उठे. उन्होंने कहा, ‘मिस्टर वाइस प्रेसिडेंट, मैं कह रहा था कि पहले से एक संशोधन (नं 954) मौजूद है. महावीर त्यागी के नये अमेंडमेंट को लेने से बेहतर है कि हम 954 नंबर अमेंडमेंट को आगे बढ़ाएं, जिसका अर्थ वही है. मुझे समझ नहीं आता कि हमें महावीर त्यागी के अमेंडमेंट के बदले इस अमेंडमेंट को वरीयता क्यों देना चाहिए.’

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कुटीर उद्योग और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने से जुड़ा था प्रस्ताव

गोपा बाबू ने आगे कहा, ‘मेरे दोस्त एक ऐसा संशोधन पेश कर रहे हैं, जो पहले से ही सदन में मौजूद है. मेरा कहना है कि गुप्ता नाथ सिंह के नाम से पहले से जब एक संशोधन हाउस में मौजूद है, तो दूसरा संशोधन पेश करने की क्या जरूरत है. गुप्ता नाथ सिंह का संशोधन कहता है कि राज्य को लघु उद्योगों को विकसित करना चाहिए और उसे बढ़ावा देना चाहिए. जितना संभव हो सके, गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर भी राज्य सरकार को जोर देना चाहिए. इसके लिए दूसरा संशोधन पेश करने की जरूरत नहीं है. अगर संशोधन पेश करने वाले को आपत्ति न हो, तो हमें अमेंडमेंट संख्या 954 पर बहस करनी चाहिए और इसे क्लॉज 34-ए के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए. इसके बाद इस विषय पर बहस शुरू हुई. इस विषय पर एचवी कामत, एस नागप्पा, एल कृष्णस्वामी भारती, एम अनंतसयनम अयंगर, महावीर त्यागी और डॉ बीआर आंबेडकर ने अपने विचार रखे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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