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रेड़मा छात्रावास से निकली शोभायात्रा

Updated at : 06 Dec 2024 5:32 PM (IST)
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रेड़मा छात्रावास से निकली शोभायात्रा

शुक्रवार को संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ भीम राव आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया.

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फोटो 6 डालपीएच- 1प्रतिनिधि, मेदिनीनगरशुक्रवार को संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ भीम राव आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया. शहर के बाईपास रोड रेडमा स्थित राजकीय अनुसूचित जाति कल्याण छात्रावास परिसर में स्थापित बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. इसके बाद छात्रावास में रह रहे छात्रों ने शोभायात्रा निकाली. छात्रावास परिसर से निकली शोभायात्रा रेड़मा चौक, रेलवे ओवर ब्रिज, शहीद चौक, महात्मा गांधी मार्ग, छहमुहान, शहर थाना होते हुए आंबेडकर पार्क पहुंचा. इसके बाद पार्क में स्थापित बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. शोभायात्रा का नेतृत्व छात्रावास अधीक्षक प्रो अजय राम ने किया. शोभायात्रा में शामिल छात्रों ने बाबा साहेब तेरा मिशन अधूरा, हम सब छात्र करेंगे पूरा, जब तक सूरज चांद रहेगा, बाबा तेरा नाम रहेगा सहित कई नारे लगा रहे थे. छात्रावास अधीक्षक प्रो अजय राम ने कहा कि बाबा साहेब महामानव थे. वे संविधान का निर्माण कर देश के सभी लोगों को समान अधिकार दिया हैं. बाबा साहेब के आदर्श जीवन से सीख लेने की जरुरत है. आज के दिन संविधान की रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए. बाबा साहब की पुण्य तिथि के पूर्व संध्या पर गुरुवार को छात्रावास परिसर से कैंडल मार्च निकाला गया, जो आंबेडकर पार्क तक गया. शोभायात्रा में परमानंद भारती, दीपक कुमार, सुमंत कुमार, सूरज, अनिल, रंजन, अमित पासवान, अरविंद के साथ छात्रावास के सैकड़ों छात्र शामिल थे.

बाबा साहेब की पुण्यतिथि मनायी गयी

मेदिनीनगर. बेरोजगार संघर्ष मोर्चा ने शुक्रवार को बाबा साहेब डॉ बीआर आंबेडकर जी की 68वीं पुण्य तिथि मनायी. कार्यक्रम की अध्यक्षता मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने की. संचालन संजय कुमार ने किया. मोर्चा के सदस्यों ने राजकीय अनुसूचित जाति कल्याण छात्रावास में स्थापित डॉ भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इसके बाद विचार गोष्ठी शुरू हुई. मोर्चा अध्यक्ष उदय राम ने कहा कि बाबा साहेब डॉ भीम राव आंबेडकर मानव नहीं, बल्कि महामानव थे. छह दिसंबर 1956ई को उनका निधन हुआ था. संविधान के निर्माण में उनकी अहम भूमिका रही. उन्होंने दलितों को हक अधिकार दिलाकर उनका मान सम्मान बढ़ाया. राष्ट्र के नव निर्माण में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. सूरज कुमार ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला. मौके पर अक्षय, अरुण पासवान, उत्तम, दीपक, सुधीर, शिव नारायण साव, जयपाल मोची, श्याम पाठक, संतोष विश्वकर्मा, सतीश दुबे, राम नरेश महतो ने विचार व्यक्त किया.

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