नदी में पानी आने के बाद भी शहर में जलापूर्ति व्यवस्था लचर

Updated at : 02 Jul 2024 9:37 PM (IST)
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नदी में पानी आने के बाद भी शहर में जलापूर्ति व्यवस्था लचर

कहीं मोटर खराब, तो कहीं पंप हाउस में गड़बड़ी, पानी के लिए उपभोक्ता परेशान

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मेदिनीनगर. कोयल नदी में पानी आने के बाद शहर में जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. सोमवार को किसी भी मुहल्ले में जलापूर्ति नहीं हुई. इस कारण जलापूर्ति पर निर्भर रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. शहर की सभी जलापूर्ति योजना कोयल नदी पर निर्भर है. बेलवाटिका स्थित पंप हाउस से कोयल नदी से पानी का उठाव कर विभिन्न जगहों पर स्थापित जलमीनार में चढ़ाया जाता है. इसके बाद पोषक क्षेत्र में जलापूर्ति होती है. कोयल नदी में पानी आने के बाद एक जुलाई को पंपूकल का फुटबॉल बालू में जाम हो गया. इस वजह से शहर के किसी जलमीनार में पानी नहीं चढ़ाया जा सका. इस कारण सोमवार को शहर में जलापूर्ति नहीं हुई. इधर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सोमवार को कोयल नदी में फंसे मोटर पंप के फुटबॉल को बाहर निकाल कर उसे दुरुस्त कराया, इसके बाद पानी उठाव शुरू हुआ. लेकिन थोड़ी देर के बाद ही मोटर खराब हो गया. जिसकी मरम्मत का काम शुरू किया गया, तो रात में पंप हाउस में खराबी आ गयी. रात में ही उसे भी दुरुस्त किया गया. तब जाकर स्टेशन रोड व बीएन कॉलेज मैदान स्थित जलमीनार में पानी चढ़ सका अौर मंगलवार की सुबह पोषक क्षेत्र में जलापूर्ति हुई. इधर, आइटीआइ मैदान व पीएचइडी कार्यालय परिसर स्थित जलमीनार में मंगलवार की सुबह पानी चढ़ाया गया और 10 बजे के बाद जलापूर्ति बहाल की गयी. दोपहर 12 बजे के बाद जिला स्कूल पानी टंकी से पोषक क्षेत्र में जलापूर्ति की गयी. इसके अलावा कुंड मोहल्ला, हमीदगंज, मुंसफ रोड, जेलहाता में सीधी जलापूर्ति हुई.

जलापूर्ति के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा :

उपभोक्ताअों का कहना है कि विभाग जलापूर्ति के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा कर रहा है. अपनी कमियों को छुपाने के लिए विभाग के पदाधिकारी व कर्मी जनता को गुमराह करते हैं. वाटर ट्रीटमेंट की व्यवस्था होने के बाद भी शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है. मंगलवार को थोड़ी देर के लिए जलापूर्ति हुई थी. मालूम हो कि कोयल नदी में बारिश का पानी आ गया है. लेकिन भू-जलस्तर बढ़ा नहीं है. इस कारण शहर की 90 प्रतिशत से अधिक बोरिंग अब भी सूखी हुई है. इधर निगम प्रशासन ने टैंकर से जल का वितरण बंद कर दिया है. ऐसी स्थिति में शहर के लोग भीषण जल संकट झेलने को मजबूर हैं..

पानी टंकी की चाबी एक माह से खराब :

जिला स्कूल के मैदान में बनी पानी टंकी की चाबी करीब एक माह से खराब है. इसकी मरम्मत कराने के प्रति विभाग गंभीर नहीं है. वैकल्पिक तौर पर विभाग ने इस जलमीनार के पोषक क्षेत्र में सीधी जलापूर्ति की व्यवस्था की है. पिछले एक माह से इसी तरह जलापूर्ति की जा रही है. उपभोक्ताओं की मानें तो सीधी जलापूर्ति थोड़ी देर के लिए होती है. पानी में प्रेशर भी नहीं रहता है. इस कारण सभी लोगों को पानी नहीं मिल पाता. विभाग चाबी दुरुस्त कराकर पर्याप्त जलापूर्ति कराये. लोगों की शिकायत है कि विभाग के पदाधिकारी व कर्मी सीधी बात नहीं करते.

सुदना जलापूर्ति केंद्र की भी चाबी है खराब :

सुदना जलापूर्ति केंद्र के जलमीनार की चाबी चार दिनों से खराब है. पिछले दो दिन से विभाग सीधी जलापूर्ति कर रहा है. लेकिन इसका लाभ सभी लोगों को नहीं मिल पा रहा है. बताया जाता है कि आधे घंटे के लिए सीधी जलापूर्ति की जाती है, लेकिन प्रेशर नहीं होने के कारण कुछ लोगों को ही पानी मिल पाता है. इस जलापूर्ति केंद्र से अघोर आश्रम रोड, पंचवटी नगर, सुखवन टांड, पटेलनगर, राजनगर, आजादनगर, शांतिपुरी, जगनारायण पथ में जलापूर्ति की व्यवस्था है. लेकिन सीधी जलापूर्ति कुछ ही मुहल्ले में होती है, वह भी अपर्याप्त.

बारालोटा जलापूर्ति योजना खस्ता हाल :

पीएचइडी व नगर निगम की लापरवाही के कारण बारालोटा जलापूर्ति योजना खस्ताहाल है. गर्मी के दिनों में भी पोषक क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति नहीं की गयी. बताया जाता है कि भूसही प्लांट के पास जैकवेल से पानी का उठाव नहीं किया जाता था. क्योंकि स्टैंड गैलरी पिछले तीन साल से टूटा हुआ है. इसे बदलने के प्रति निगम प्रशासन गंभीर नहीं है. कोयल नदी से सीधे पानी का उठाव कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भेजने की व्यवस्था है. गर्मी में पानी के अभाव का रोना रोते हुए निगम प्रशासन ने नियमित जलापूर्ति नहीं की. अब कोयल नदी में पानी आने के बाद भी लोगों को जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल रहा है. पिछले तीन दिन से जलापूर्ति ठप है. बताया जाता है कि दो नंबर टाउन रेड़मा में रेलवे के केबलिंग का कार्य करा रही कंपनी द्वारा ड्रिलिंग कराये जाने के दौरान पाइप क्षतिग्रस्त हो गयी थी. निगम प्रशासन ने मंगलवार को इसकी मरम्मत करायी. बुधवार से पोषक क्षेत्र में जलापूर्ति संभव है. लोगों की शिकायत है कि गंदे जल की आपूर्ति होती है. जबकि चियांकी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है. लेकिन पानी पूरी तरह से साफ नहीं किया जाता है.

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