करोड़ों की योजना, बूंद-बूंद को तरसता शहर

Published by :Akarsh Aniket
Published at :14 Jan 2026 9:18 PM (IST)
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करोड़ों की योजना, बूंद-बूंद को तरसता शहर

11.47 करोड़ की जलापूर्ति परियोजना फेल, 40 हजार आबादी को नहीं मिला शुद्ध पेयजल

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11.47 करोड़ की जलापूर्ति परियोजना फेल, 40 हजार आबादी को नहीं मिला शुद्ध पेयजल कृष्णा गुप्ता, हरिहरगंज नगर पंचायतवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पेयजल व स्वच्छता विभाग द्वारा तैयार की गयी जलापूर्ति योजना लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है. वर्ष 2022 में 11 करोड़ 47 लाख रुपये की लागत से शुरू की गयी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम तो पूरा कर लिया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में जलापूर्ति ठप हो गयी. प्रखंड कार्यालय परिसर में जलमीनार का निर्माण कर शहरी इलाके में कुछ माह पूर्व जलापूर्ति शुरू की गयी थी, लेकिन जल्द ही पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण आपूर्ति बंद हो गयी. विभाग द्वारा बिछायी गयी पाइपलाइन कई स्थानों पर टूट गयी है, जिससे सड़क पर पानी बेकार बह रहा है और अधिकांश घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. स्थानीय लोगों ने विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पाइप बिछाने और निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा गया. यही कारण है कि योजना शुरू होते ही दम तोड़ गयी. बताया गया कि करीब एक वर्ष पूर्व पानी टंकी नगर पंचायत को हैंडओवर कर दी गयी थी, बावजूद इसके न तो क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की समुचित मरम्मत करायी गयी और न ही टंकी के नियमित संचालन के लिए ट्यूबवेल ऑपरेटर की नियुक्ति की गयी. इस योजना के तहत नगर पंचायत क्षेत्र के हरिहरगंज, अररुआ कला, अररुआ खुर्द, पाठक बिगहा, बिशुनपुर, बेलोदर, भगत तेंदुआ, कोशडीहरा, खापकटैया, पीपरा, अंबा और डेमा में शुद्ध पेयजल आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया था. करीब 11.66 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले नगर पंचायत की आबादी लगभग 40 हजार है, जो आज भी पेयजल संकट से जूझ रही है. घटिया सामग्री और उदासीनता से जनता नाराज समाजसेवी राजीव रंजन ने कहा कि घटिया सामग्री के उपयोग और प्राक्कलन के अनुरूप काम नहीं होने के कारण योजना जनता के लिए बेकार साबित हुई है. वैश्य जागृति मंच के अध्यक्ष गंगा जायसवाल ने कहा कि शुद्ध पेयजल को लेकर जो उम्मीद इस योजना से थी, वह संवेदक की लापरवाही से टूट गयी.व्यवसायी कृष्ण कुमार क्रांतिकारी ने कहा कि पाइपलाइन कई जगहों से टूटी हुई है और कार्य में अनियमितता बरती गयी है. वहीं, व्यवसायी दिनेश स्वर्णकार ने कहा कि करोड़ों की लागत से बनी यह योजना जनता की उम्मीदों पर पानी फेरने जैसी साबित हुई है.नगरवासियों का कहना है कि यदि योजना को पूरी तरह दुरुस्त कर दिया जाए, तो वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान संभव है, लेकिन फिलहाल पूरी तरह तैयार जलमीनार प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोगों की प्यास बुझाने में अक्षम बनी हुई है.

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