विस्थापित लोगों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला
Published by : Akarsh Aniket Updated At : 22 May 2026 10:05 PM
विस्थापित लोगों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला
प्रतिनिधि : मोहम्मदगंज पलामू जिले में काशी स्रोत डैम से विस्थापित हुए लोगों को अब तक भूमि अधिग्रहण का मुआवज़ा नहीं मिला है. लगभग 30 एकड़ भूमि के अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी ज़मीन जाने के बाद भी उन्हें उचित क्षतिपूर्ति नहीं दी गयी. इसी कारण विस्थापितों ने विरोध स्वरूप डैम से जुड़ी समितियों की गतिविधियां रोक दी हैं. मछली पकड़ना और मोटर बोटिंग पर रोक लगा दी गयी है. तीनों समितियों ने इस मामले में हुसैनाबाद अनुमंडल न्यायालय में परिवाद दाखिल किया है, जिसकी अगली सुनवाई 26 मई को निर्धारित है. एक माह से नौका विहार बंद डैम से आजीविका के लिए बनी पहली समिति भजनिया गांव के सुनील कुमार के नाम से 2029 तक के लिए बंदोबस्त की गयी थी. इसके बाद दो अन्य समितियों को भी विभाग ने लिखित सहमति दी थी, जिनमें नौका विहार और मत्स्य उत्पादन शामिल हैं. बटौवा गांव के चंद्रमा चौहान के नाम से बनी समिति को पर्यटन विभाग ने नौका विहार का संचालन दिया था. 23 मार्च को विधायक संजय कुमार सिंह यादव ने इसका उदघाटन किया था. लेकिन विवाद के चलते एक माह से नौका विहार बंद है, जिससे सैलानियों में निराशा है और पर्यटन प्रभावित हुआ है. पर्यटन स्थल भीम चूल्हा भी संकट से गुजर रहा है इधर, पलामू जिले का घोषित पर्यटन स्थल भीम चूल्हा भी संकट से गुजर रहा है. भीषण गर्मी और जलस्तर में कमी के कारण यहाँ नौका विहार प्रभावित हुआ है. दो बोट में से एक खराब हो चुकी है और केवल एक ही बोट सैलानियों के लिए उपलब्ध है. जलस्तर कम होने से बोटिंग का संचालन कठिन हो गया है. बताया जाता है कि बाराज के बाएं नहर के मुख्य फाटक में छेद होने के बावजूद जल संसाधन विभाग ने मरम्मत नहीं की. इसके विपरीत, अधिकारियों के आदेश पर कंट्रोल रूम के कर्मियों ने नदी में पानी बहा दिया, जिससे जलस्तर और घट गया. स्थानीय लोगों की आजीविका पर गहरा असर इन परिस्थितियों ने विस्थापितों और स्थानीय लोगों की आजीविका पर गहरा असर डाला है. मत्स्य उद्योग और पर्यटन दोनों ठप हो गये हैं. विस्थापितों का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी से समस्या बढ़ रही है. समितियों को उम्मीद है कि न्यायालय और प्रशासन जल्द समाधान निकालेंगे ताकि उनकी रोज़ी-रोटी फिर से चल सके.
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