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पैसे के बिना नहीं बुझेगी प्यास

जिले में पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है. कुएं, चापाकल सभी सूखते जा रहे हैं. ऐसे में सक्षम लोग तो खरीद कर अपनी आवश्यकता पूरी कर लेते हैं, लेकिन गरीबों को काफी परेशानी हो रही है. हैदरनगर (पलामू) : हैदरनगर का पंप हाउस छह माह से बंद है. जो सार्वजनिक कूप […]

जिले में पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है. कुएं, चापाकल सभी सूखते जा रहे हैं. ऐसे में सक्षम लोग तो खरीद कर अपनी आवश्यकता पूरी कर लेते हैं, लेकिन गरीबों को काफी परेशानी हो रही है.
हैदरनगर (पलामू) : हैदरनगर का पंप हाउस छह माह से बंद है. जो सार्वजनिक कूप थे, उसका अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है. पूर्व में जो चापाकल मई और जून महीने में जवाब देने की स्थिति में आते थे, वह इस बार अप्रैल में ही हांफने लगे हैं. स्थिति क्या होगी, यह सोचकर लोग परेशान हैं.
लेकिन विभाग द्वारा समस्या को दूर करने के लिए सक्रियता के साथ पहल नहीं की जा रही है. स्थिति यह है कि जो लोग दूर-दराज से हैदरनगर प्रखंड मुख्यालय में आते हैं, उन्हें पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है. जो गरीब हैं, वह ठेला पर जाते हैं, वहां भी पानी मुफ्त में नहीं मिलता. एक रुपये प्रति गिलास के दर से पानी मिल रहा है.
जो सक्षम हैं, वह या तो बोतल खरीदते हैं या फिर पानी का पाउच. यह स्थिति हैदरनगर जैसे ग्रामीण इलाके में है. लोगों का कहना है कि पहले कुआं होता था, एक कुआं से एक मुहल्ले की प्यास बुझ जाती थी. लेकिन हैदरनगर के तीन सार्वजनिक कुआं का अस्तित्व संकट में है. हैदरनगर अस्पताल के पास, कइसा कुआं और तिवारी जी के मैदान में जो कुआं था, उसका जलस्तर काफी नीचे चला गया है. अब इसके रख-रखाव पर भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता, जिसके कारण यह स्थिति बनी है. 1993 में हैदरनगर में पंप हाउस बना था. इससे बाजार क्षेत्र में आपूर्ति होती है. कई जगहों पर सार्वजनिक नल की व्यवस्था थी, इसलिए दूर-दराज से जो लोग आते थे, उन्हें पीने को पानी मिल जाता था. लेकिन छह माह से पंप हाउस बंद है.
लो वोल्टेज से परेशानी
पंप हाउस बंद रहने का पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने जो कारण बताया है, उसके मुताबिक लो वोल्टेज से परेशानी हो रही है. यदि स्टेबलाइजर हो, तो यह समस्या दूर हो सकती है, लेकिन स्टेबलाइजर खरीदने के लिए विभाग के पास फंड का अभाव है. विभाग का यह तर्क है कि मुखिया इसके लिए पैसा उपलब्ध करा सकती हैं.
फंड नहीं है, कैसे करें व्यवस्था : मुखिया
मुखिया सीमा देवी का कहना है कि अभी तक कोई फंड नहीं आया है, ऐसे में वह कहां से स्टेबलाइजर की व्यवस्था करेंगी. यह मामला उनके जानकारी में है, यदि राशि उपलब्ध होगी, तो प्राथमिकता के आधार पर पंप हाउस को चालू कराया जायेगा.
10 साल में 10 फीट नीचे गया जल स्तर
हैदरनगर के लोग बताते हैं कि हैदरनगर रेलवे गुमटी, चौक बाजार के पास जो चापाकल है, उसका जलस्तर ठीक था, पहले गरमी के मौसम में भी मई-जून तक चापानल ठीक काम करता था, लेकिन इस बार अप्रैल में ही यह चापाकल दम तोड़ने लगा है. काफी मेहनत के बाद पानी निकलता है.
लोगों का कहना है कि जल संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है. पीसीसी रोड बन रहे हैं, पानी का कहीं ठहराव नहीं हो रहा है. पिछले 10 वर्षों में इस इलाके में जलस्तर लगभग 10 फीट नीचे गया है. इसके बाद भी यदि लोग गंभीर नहीं हुए तो आने वाले में क्या होगा. यह सोचकर लोग चिंतित हैं.
Prabhat Khabar Digital Desk
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