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झारखंड में मनरेगा का सुपरविजन सुदृढ़ करें : अमरजीत सन्हिा

झारखंड में मनरेगा का सुपरविजन सुदृढ़ करें : अमरजीत सिन्हातसवीर राज कौशिक कीवरीय संवाददाता, रांचीकेंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव अमरजीत सिन्हा ने कहा है कि झारखंड में मनरेगा कार्यों के तकनीकी पर्यवेक्षण (सुपरविजन) को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. झारखंड समेत कई राज्यों में मनरेगा कार्यों का निरीक्षण नहीं हो पाता है. […]

झारखंड में मनरेगा का सुपरविजन सुदृढ़ करें : अमरजीत सिन्हातसवीर राज कौशिक कीवरीय संवाददाता, रांचीकेंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव अमरजीत सिन्हा ने कहा है कि झारखंड में मनरेगा कार्यों के तकनीकी पर्यवेक्षण (सुपरविजन) को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. झारखंड समेत कई राज्यों में मनरेगा कार्यों का निरीक्षण नहीं हो पाता है. उन्होंने कहा कि झारखंड में मनरेगा से सिर्फ कुंआ ही नहीं, तालाब, भूमि का क्षरण रोकने, वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्यों को लेने की जरूरत है. श्री सिन्हा ने मनरेगा के तहत झारखंड में निर्मित कुंओं से आजीविका में सुधार पर जारी रिपोर्ट कार्यक्रम में यह बातें कहीं. उन्होंने कहा कि झारखंड में सिंचिंत भूमि का क्षेत्रफल बढ़ाते हुए संरक्षित सिंचाई की सुविधा विकसित करने की जरूरत है. समय पर मनरेगा योजनाओं का भुगतान हो, इस पर सरकार को नीतिगत फैसला लेना चाहिए. झारखंड के उग्रवाद प्रभावित जिलों में शैक्षणिक और आर्थिक संपन्नता के लिए कार्य करने की जरूरत है. इन जिलों में लोगों की प्राथमिकताओं पर भी ध्यान देना होगा. अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा कि कुंआ से सबको लाभ हो रहा है. उन्होंने असफल कुंओं के लिए जोखिम मुआ‌वजा देने की वकालत की. कार्यक्रम को नरेगा वाच के जवाहर मेहता ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्थशास्त्री रमेश शरण ने की. इंस्टीट्यूट आफ ह्यूमन डेवलपमेंट के हरिश्वर दयाल ने सभी का स्वागत किया. ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ 1.15 प्रतिशत क्राॅपिंग राज्य के ग्रामीण विकास सचिव एनएन सिन्हा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ 1.15 प्रतिशत ही क्राॅपिंग हो रही है. इसे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि कृषि उत्पादन और बढ़ सके. अब सरकार ने योजनाओं का चयन ग्राम स्तर पर करने का निर्देश दिया है. आजीविका बढ़ानेवाली योजनाएं अधिक से अधिक लेने पर बल दिया जा रहा है. कुंआ अब प्राथमिकता नहीं है, पर मनरेगा में जो इस योजना को लेना चाहते हैं, उन्हें ना नहीं कहा जायेगा. केंद्र सरकार से झारखंड ने मनरेगा क मजदूरी और न्यूनतम मजदूरी में व्याप्त असमानता को दूर करने का अनुरोध किया है. कुओं से बढ़ी 200 फीसदी आमदनीकुओं पर आधारित रिपोर्ट अंजोर भास्कर और पंकज यादव ने तैयार की है. इसके लिए छह जिलों के 12 पंचायतों में एक हजार कुएं का सर्वेक्षण किया गया. सर्वेक्षण में पाया गया कि कुंआ बनने के बाद से लाभुकों की आमदनी 200 फीसदी बढ़ी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 में शुरू की गयी योजना के तहत झारखंड में मनरेगा से 1.15 लाख कुआं बनाने का लक्ष्य रखा गया था. इसमें से 76 प्रतिशत पूरी हो गयी है. 24 प्रतिशत कुएं अब भी अधूरे पड़े हैं. आठ प्रतिशत कुओं का कोई अता-पता नहीं है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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