जनसंख्या नीति का पुनर्निर्धारण करे सरकारफ्लैग : आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में पारित हुआ प्रस्ताव-सब पर समान रूप से लागू हो जनसंख्या नीति -जनसंख्या वृद्धि दर में असंतुलन चिंताजनक -घुसपैठ पर अंकुश लगेबैठक में जो उपस्थित थेसंघ कार्यकारी मंडल की बैठक में सर संघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी, सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय जी होसबाले, सह सरकार्यवाह डॉ कृष्णगोपाल ,सह सरकार्यवाह वी भागय्या, अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन, भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री राम माधव, सौदान सिंह, विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ प्रवीण तोगड़िया , चंपत राय, झारखंड के प्रांत प्रचारक अनिल मिश्रा, सह प्रांत कार्यवाह राकेश लाल समेत संघ के 400 से अधिक अखिल भारतीय पदाधिकारी उपस्थित थे. क्या-क्या कहा-भारत के संविधान के तहत ईसाई, मुसलिम, यहूदी और पारसी को छोड़ कर भारत में सब लोग हिंदू कोड बिल में आते हैं -1951 से भारत में रहनेवाले सभी लोग भारतीय हैं-सरना भी हिंदू कोड बिल के तहत आते हैं-हिंदू बहुसंख्यक थे अल्पसंख्यक कैसे हो गये-घुसपैठियों को रोकने के प्रयास होने चाहिए-पाकिस्तान और बांग्लादेश से आनेवाले हिंदू, जैन, सिख और ईसाई पीड़ित हैं. अवैध घुसपैठिये नहीं-अवैध घुसपैठियों की पहचान हो, उनको अधिकार से वंचित किया जाये-एक नेशनल रजिस्टर अॉफ सिटिजन बने वरीय संवाददातारांची : राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दूसरे दिन शनिवार को जनसंख्या वृद्धि दर में असंतुलन पर प्रस्ताव पारित किया गया. संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि देश में उपलब्ध संसाधनों, भविष्य की आवश्यकताओं और जनसांख्यिकीय असंतुलन की समस्या को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या नीति का पुनर्निर्धारण करे. साथ ही इसे सब पर समान रूप से लागू किया जाये. संघ ने देश के सीमवर्त्ती राज्यों में भी जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जतायी है. सीमा पार से हो रही घुसपैठ पर अंकुश लगाने की मांग की है. साथ ही राष्ट्रीय नागरिक पंजिका(नेशनल रजिस्टर अॉफ सिटिजन्स) का निर्माण कर घुसपैठियों की नागरिकता समाप्त करने व नागरिक अधिकारों से वंचित करने की मांग भी की है.हिंदू मत पंथ की संख्या पांच प्रतिशत घटीसरला बिरला स्कूल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्णगोपाल ने बताया : सरकार ने 2011 में सांप्रदाय के आधार पर की गयी जनगणना की रिपोर्ट जारी की है. इसमें भारतीय मूल के संप्रदाय का उल्लेख किया गया है. अगर हम 1951 और 2011 में जारी किये गये आंकड़े की तुलना करते हैं, तो पिछले 60 वर्ष के दौरान हिंदू मत पंथ की संख्या पांच प्रतिशत घट गयी है. वहीं, इस दौरान मुसलिम समुदाय की जनसंख्या पांच प्रतिशत बढ़ गयी है. सीमावर्ती इलाकों में मुसलिम आबादी का ग्रोथ रेट चार गुना बढ़ा है. मणिपुर में भारतीय मतपंथों की संख्या 30 प्रतिशत घटीउन्होंने बताया : मणिपुर में भारतीय मतपंथों की संख्या 30 प्रतिशत घट गयी है. अरुणाचल प्रदेश में 99 प्रतिशत से घट कर 67 प्रतिशत हो गयी है. असम में मुसलिमों की आबादी बढ़ कर 34.22 प्रतिशत हो गयी है. असम के छह जिलों, प बंगाल के सीमावर्ती जिले, बिहार के किशनगंज में भी हिंदू अल्पसंख्यक हो गये हैं. जनसंख्या वृद्धि में भारी अंतर विदेशी घुसपैठ और मतांतरण के कारण हो रहा है. इससे देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक पहचान संकट में पड़ गयी है. डॉ कृष्णगोपाल के साथ अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य, सह प्रचार प्रमुख जे नंदकुमार, सह प्रांत कार्यवाह राकेश लाल मौजूद थे.
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जनसंख्या नीति का पुनर्नर्धिारण करे सरकार
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