पाकुड़ में स्नातक सीट कटौती के खिलाफ दूसरे दिन भी हड़ताल, छात्रों ने कॉलेज में जड़ा ताला
पाकुड़ के केकेएम कॉलेज में प्रदर्शन करते छात्र. फोटो: प्रभात खबर
संथाल परगना के महाविद्यालयों में स्नातक सीटों में की गई कटौती के विरोध में छात्र-छात्राओं का आंदोलन तेज हो गया है. पाकुड़ के केकेएम कॉलेज में दूसरे दिन भी हड़ताल जारी रही. छात्रों की मांग है कि सीटों में कटौती का फैसला वापस लिया जाए.
Student Strike: संथाल परगना के महाविद्यालयों में स्नातक सीटों में की गई कटौती के विरोध में छात्र-छात्राओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. पाकुड़ के केकेएम कॉलेज में गुरुवार को दूसरे दिन भी हड़ताल जारी रही. आदिवासी कल्याण बालक छात्रावास और एनएसयूआई से जुड़े छात्र-छात्राएं कॉलेज परिसर के बाहर धरने पर बैठे रहे. आंदोलनकारियों ने सीटों में भारी कटौती के फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय ने जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.
पांच दिन का अल्टीमेटम भी बेअसर
धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं ने बताया कि जैसे ही स्नातक सीटों में कटौती की घोषणा हुई, उन्होंने कॉलेज के प्राचार्य के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन को आवेदन भेजकर इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी. इसके साथ ही विश्वविद्यालय को पांच दिनों का अल्टीमेटम भी दिया गया था. छात्रों का आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद विश्वविद्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला और न ही समस्या के समाधान के लिए कोई पहल की गई. इसी कारण छात्रों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा.
4800 से घटाकर 1800 सीट करने का विरोध
आंदोलनकारी छात्राओं ने बताया कि केकेएम कॉलेज में पहले स्नातक स्तर पर करीब 4800 सीटें उपलब्ध थीं, लेकिन अब इन्हें घटाकर केवल 1800 कर दिया गया है. उनका कहना है कि इतनी बड़ी कटौती से हजारों छात्र-छात्राओं के सामने उच्च शिक्षा का संकट खड़ा हो जाएगा. छात्रों के अनुसार, हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस कॉलेज में नामांकन के लिए आवेदन करते हैं. ऐसे में सीटों की संख्या कम होने से अनेक योग्य छात्र-छात्राएं दाखिले से वंचित रह जाएंगे.
अभिभावकों की बढ़ेगी परेशानी
धरना दे रहे छात्रों ने कहा कि पाकुड़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों के अधिकांश परिवार सीमित आय के बावजूद अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं. यदि स्थानीय कॉलेजों में सीटें कम कर दी जाएंगी, तो छात्रों को दूसरे जिलों या शहरों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ेगा, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा कि सभी परिवार अपने बच्चों को बाहर भेजने की स्थिति में नहीं हैं. ऐसे में सीट कटौती का फैसला गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी परेशानी पैदा करेगा. छात्रों का आरोप है कि इस निर्णय से हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है.
संथाल परगना के कई कॉलेजों में चल रहा आंदोलन
छात्र नेताओं ने बताया कि यह आंदोलन केवल पाकुड़ तक सीमित नहीं है. संथाल परगना के कई महाविद्यालयों में भी स्नातक सीटों में कटौती के विरोध में छात्र-छात्राएं आंदोलन कर रहे हैं. बीते बुधवार से विभिन्न कॉलेजों में धरना, प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. धरना प्रदर्शन में छात्र नेता कमल मुर्मू, छात्र नायिका शबनम मरांडी, छात्र नायक अजय हेंब्रम, उप छात्र नायक रोजी मरांडी, शबनम मुर्मू, रेनू मरांडी, रोज मेरी हांसदा, सरिता मरांडी, शाहजमल शेख, परवेज आलम, मोहम्मद शेख, जय सोरेन, सरफराज आलम, भीमसेन मरांडी, सुभाष चंद्र मुर्मू सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे.
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प्राचार्य बोले, विश्वविद्यालय को भेजी गई है सूचना
मामले को लेकर केकेएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. युगल झा ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा कॉलेज में तालाबंदी किए जाने से नियमित शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को भेज दी गई है. प्राचार्य ने कहा कि अभी तक विश्वविद्यालय की ओर से कोई नया निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. जैसे ही कोई आदेश मिलेगा, उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल कॉलेज प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और विश्वविद्यालय के निर्देशों का इंतजार कर रहा है. वहीं छात्र-छात्राओं ने स्पष्ट किया है कि सीट कटौती का निर्णय वापस नहीं होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
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लेखक के बारे में
By राघव कुमार मिश्रा
राघव कुमार मिश्रा प्रभात खबर के पाकुड़ प्रतिनिधि हैं. उन्होंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है. वर्ष 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. प्रशासन, राजनीति, अपराध, सामाजिक सरोकार, शिक्षा और विकास से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उन्हें व्यापक अनुभव है. जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए उन्हें जाना जाता है.
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