धावाडंगाल सगात टोला के लोग कूप का पानी पीने को विवश

Updated at : 02 May 2025 5:36 PM (IST)
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धावाडंगाल सगात टोला के लोग कूप का पानी पीने को विवश

पाकुड़िया. बासेतकुंडी पंचायत धावाडंगाल अंतर्गत सगात टोला के लोग देश की आजादी के बाद भी खुले कुएं का पानी पीने को लाचार हैं.

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पाकुड़िया. प्रखंड के सुदूरवर्ती बासेतकुंडी पंचायत धावाडंगाल अंतर्गत सगात टोला के लोग देश की आजादी के बाद भी खुले कुएं का पानी पीने को लाचार हैं. ग्रामीण रवि टुडू, मकु हांसदा, बिटीमय मरांडी, कल्याण मरांडी, सुभाष टुडू ने बताया कि सगात टोला से कुछ दूरी में सड़क किनारे दो चापानल तो है, परंतु वह करीब एक साल से खराब बेकार पड़ा हुआ है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है. इस कारण उन लोगों को मजबूरन खुले कूप का पानी पीना पड़ता है. हमलोगों को मजबूरन 20 सालों से यही पथरीली कुएं का गंदा पानी पीना पड़ता है. यहां पांच साल पहले भी एक और बोरिंग हुई थी पर वह सफल नहीं हो पायी. लोगों ने बताया कि पाइपलाइन जलापूर्ति योजना का लाभ भी हमलोगों को नहीं मिल रहा है. इस कारण उन्हें खुले कूप का गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है. ज्ञात हो कि इस गांव में कुछ साल पहले भयानक रूप से डायरिया का प्रकोप हुआ था, जिससे एक व्यक्ति की मृत्यु भी हो चुकी थी. ग्रामीणों ने विभागीय उच्चाधिकारियों से धावाडंगाल सगात टोला के खराब पड़े चापानलों को अविलंब ठीक कराने की मांग की है. वहीं बीडीओ से भी इसपर ध्यान देने की मार्मिक अपील की है. इस बाबत पीएचइडी के जेइ चंदन सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है. गांव में जाकर देखा गया कि वहां पानी का लेयर काफी नीचे है.

क्या कहते हैं ग्रामीण

हमलोगों को पानी के लिए काफी परेशानी होती है. यहां कुआं छोड़कर और पानी की कोई सुविधा नहीं है. सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है.

-रवि टुडू, ग्रामीणहमलोगों को रोजाना कुएं का गंदा पानी पीना पड़ता है. इससे हमलोग बीमार भी हो जाते हैं. यहां जलमीनार भी नहीं है और चापानल भी खराब पड़ा है.

-मकु हांसदा, ग्रामीणगांव से कुछ दूरी पर सड़क किनारे दो चापानल खराब पड़ा हुआ है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. हमलोगों को पानी के लिए काफी परेशानी होती है.

-बिटीमय मरांडी, ग्रामीणइस गांव में 50 परिवार रहता है. यहां पानी की कोई सुविधा नहीं है. एक कुआं के भरोसे हैं. हमलोगों को गंदा पानी पीना पड़ता है. सरकार को इस पर ध्यान दे.

-कल्याण मरांडी, ग्रामीण

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