झारखंड के महेशपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए जाना पड़ता है बंगाल, जाने क्या हैं चुनावी मुद्दे

Jharkhand Assembly Election: अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित झारखंड का महेशपुर विधानसभा ऐसा क्षेत्र है, जहां के लोगों को इलाज के लिए पड़ोसी राज्य जाना पड़ता है.
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Jharkhand Assembly Election|पाकुड़, रमेश भगत : झारखंड का महेशपुर विधानसभा अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीट है. पाकुड़ जिले के महेशपुर और पाकुड़िया प्रखंड महेशपुर विधानसभा में शामिल है. यह विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है.

लंबे अरसे बाद स्टीफन मरांडी लगातार दूसरी बार जीते चुनाव
इस विधानसभा सीट को लेकर एक आम मान्यता है कि हर बार चुनाव में यहां से विधायक बदल जाते हैं, लेकिन पिछले चुनाव में प्रो स्टीफन मरांडी लगातार दूसरी बार जीते. झारखंड बनने के बाद वर्ष 2000 में देवीधन बेसरा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर महेशपुर के विधायक चुने गये थे.
महेशपुर विधानसभा सीट पर है झामुमो-भाजपा की टक्कर
उसके बाद 2005 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), 2009 में झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) और 2014 व 2019 में झामुमो ने जीत हासिल की. संयुक्त बिहार में वर्ष 1995 में यहां से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) भी चुनाव जीत चुकी है. इस विधानसभा में वर्तमान में लड़ाई झामुमो और भाजपा के बीच ही है.

2019 में भाजपा के मिस्त्री सोरेन को स्टीफन ने 34106 वोट से हराया
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में झामुमो प्रत्याशी स्टीफन मरांडी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी मिस्त्री सोरेन को 34,106 वोट से हराया था. स्टीफन मरांडी को 89,197 मत हासिल हुए थे. मिस्त्री सोरेन को 55,091 वोट मिले थे.
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लोकसभा चुनाव 2024 में झामुमो को मिली बड़ी बढ़त
देखने वाली बात यह है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान महेशपुर विधानसभा क्षेत्र में झामुमो को बड़ी बढ़त मिली थी. लेकिन विधायक और सरकार एक ही पार्टी के होने के बावजूद क्षेत्र के लोगों को इसका समुचित लाभ नहीं मिला.
महेशपुर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मुद्दे
- महेशपुर विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कई मुद्दें हैं, जिस पर काम करने की काफी जरूरत है. पाकुड़ आकांक्षी जिलों में शामिल है. ऐसे में समझा जा सकता है कि इस जिले के तहत आने वाले प्रखंडों की समस्याएं भी परेशान करने वाली हैं. स्थिति यह है कि इलाज के लिए भी लोगों को बंगाल जाना पड़ता है.
- इनमें से सबसे बड़ी समस्या गांवों को जोड़ने वाली सड़कों का नहीं होना, मुख्यालय की सड़क का जर्जर होना, पेयजल की समस्या, पलायन, महेशपुर को अनुमंडल बनाने की मांग, बस स्टैंड की मांग, स्टेडियम बनाने की मांग सहित कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर ग्रामीण मुखर होते रहे हैं.
महेशपुर विधानसभा क्षेत्र के लोग खेती पर आश्रित हैं. हर कोई किसी न किसी तरीके से खेती से जुड़ा है. सब्जी की खेती का इलाके में चलन काफी बढ़ा है. ऐसे में किसानों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने की जरूरत है, ताकि फसल की पैदावार अच्छी हो. लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके.
राजेश कुमार मडंल, स्थानीय निवासी, महेशपुर
जनप्रतिनिधि अपने ही क्षेत्र से हो : महेंद्र बेसरा

महेशपुर प्रखंड के बड़कियारी गांव निवासी महेंद्र बेसरा संताली भाषा के कवि हैं. बताते हैं कि इलाके की तस्वीर तब बदलेगी, जब स्थानीय जनप्रतिनिधि गांव के स्तर पर बैठक कर समस्याओं को समझेंगे और फिर उसके समाधान के लिए प्रशासन की मदद से योजना तैयार करेंगे. ऐसा नहीं होने की वजह से ग्रामीण स्तर पर लोगों का जीवन बेहतर नहीं हो पा रहा है. बड़कियारी गांव में अपग्रेडेड प्लस टू हाइस्कूल है, लेकिन वहां जाने वाली सड़क खस्ताहाल है. गांव में पीने के पानी की समस्या है. रोजगार के लिए युवा पलायन कर रहे हैं. जनप्रतिनिधि अपने इलाके से ही हो, क्योंकि बाहर से आने वाले नेता ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. इसकी वजह से स्थानीय लोग उनसे मिलकर अपनी समस्या नहीं बता पाते.
महेशपुर और पाकुड़िया प्रखंड में बिजली की समस्या है. पड़ोस के बंगाल के गावों में 24 घंटे बिजली रहती है, लेकिन हमारे इलाके में काफी कम बिजली रहती है. इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इससे एक ओर जहां व्यवसाय में तेजी नहीं आती है, वहीं रोजगार भी मंदा है.
पूर्णेंदु कुमार सिंह, स्थानीय निवासी, महेशपुर
क्षेत्र में नहीं रहते विधायक, विकास ठप : मिस्त्री सोरेन
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में महेशपुर विधानसभा से दूसरे स्थान पर रहे भाजपा नेता मिस्त्री सोरेन कहते हैं कि क्षेत्र में समस्याएं काफी हैं. सभी समस्याएं मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ी है. इनका समाधान नहीं होने से ग्रामीण स्तर पर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. झामुमो नेता स्टीफन मरांडी पिछले 10 साल से यहां के विधायक हैं, राज्य में उनकी सरकार है, वे चाहते तो इलाके का विकास काफी तेजी से करवा सकते थे. लेकिन, विधायक न केवल अपने क्षेत्र से गायब रहते हैं, बल्कि झामुमो सरकार ने भी इलाके पर ध्यान नहीं दिया. लोगों को रोजगार के पलायन करना पड़ रहा है.

लोकसभा चुनाव 2024 में किसको मिला सबसे ज्यादा मत?
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी/दल का नाम | प्रत्याशी को मिले मत |
| विजय कुमार हांसदा | झारखंड मुक्ति मोर्चा | 1,04,355 |
| ताला मरांडी | भारतीय जनता पार्टी | 61,467 |
महेशपुर (एसटी) विधानसभा : 2019 के चुनाव परिणाम
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी/दल का नाम | प्रत्याशी को मिले मत |
| स्टीफन मरांडी | झारखंड मुक्ति मोर्चा | 89,197 |
| मिस्त्री सोरेन | भारतीय जनता पार्टी | 55,091 |
महेशपुर (एसटी) विधानसभा : 2014 के चुनाव परिणाम
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी/दल का नाम | प्रत्याशी को मिले मत |
| स्टीफन मरांडी | झारखंड मुक्ति मोर्चा | 51,866 |
| देवीधन टुडू | भारतीय जनता पार्टी | 45,710 |
महेशपुर (एसटी) विधानसभा : 2009 के चुनाव परिणाम
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी/दल का नाम | प्रत्याशी को मिले मत |
| मिस्त्री सोरेन | झारखंड विकास मोर्चा | 50,746 |
| देवीधन टुडू | भारतीय जनता पार्टी | 28,772 |
महेशपुर (एसटी) विधानसभा से अब तक कौन-कौन बने विधायक?
| चुनाव का वर्ष | चुने गए विधायक का नाम | पार्टी का नाम |
| 1952 | जीतु किस्कू | झारखंड पार्टी |
| 1957 | जीतु किस्कू | झारखंड पार्टी |
| 1962 | जोसेफ मुर्मू | स्वतंत्र पार्टी |
| 1967 | पी हांसदा | निर्दलीय |
| 1969 | कालेश्वर हेम्ब्रम | हूल झारखंड |
| 1972 | कालिदास मुर्मू | कांग्रेस |
| 1977 | विश्वनाथ मुर्मू | जेएनपी |
| 1980 | देवीधन बेसरा | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
| 1985 | देवीधन बेसरा | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
| 1990 | कालीदास मुर्मू | कांग्रेस |
| 1995 | ज्योतिन सोरेन | मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी |
| 2000 | देवीधन बेसरा | भारतीय जनता पार्टी |
| 2005 | सुफल मरांडी | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
| 2009 | मिस्त्री सोरेन | झारखंड विकास मोर्चा |
| 2014 | स्टीफन मरांडी | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
| 2019 | स्टीफन मरांडी | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
झारखंड में विधानसभा चुनाव कब है?
झारखंड में नवंबर-दिसंबर में विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं. झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी तक है. इसके पहले राज्य में चुनाव करा लिए जाएंगे. झारखंड विधानसभा चुनावों की घोषणा कभी भी हो सकती है.
झारखंड में विधानसभा की कितनी सीटें हैं?
झारखंड में विधानसभा की 81 सीटें हैं. इन सभी सीटों के लिए चुनाव कराए जाते हैं.
झारखंड में अभी किसकी सरकार है?
झारखंड में इस वक्त झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल की गठबंधन सरकार चल रही है. इसके मुखिया झामुमो के हेमंत सोरेन हैं.
महेशपुर (एसटी) विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा किस पार्टी ने जीत दर्ज की?
अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित महेशपुर विधानसभा सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने सबसे अधिक बार चुनाव जीता है. झामुमो ने 5 बार महेशपुर एसटी सीट पर जीत दर्ज की है. देवीधन बेसरा के बाद स्टीफन मरांडी इस सीट पर लगातार 2 बार जीतने वाले दूसरे विधायक बन गए हैं.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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