महेशपुर मां काली मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़

महेशपुर के अमलादही गांव में स्थित मां काली मंदिर श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है, जहाँ हर वर्ष काली पूजा पर हजारों श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालु मां से मनोकामनाएं पूरी होने पर आभूषण चढ़ाकर आभार व्यक्त करते हैं। पूजा की शुरुआत विश्वनाथ भगत ने की थी, जिसे बाद में पूरे गांव ने भव्य रूप दिया। लगभग 32 साल पहले शिवदत्त भगत ने कोलकाता से मां काली की शिलामूर्ति स्थापित कराई। पुरोहित मोहनलाल मिश्रा पूजा करते हैं। निशा पूजा विशेष महत्व रखती है और बिहार, पश्चिम बंगाल समेत आसपास के जिलों से श्रद्धालु आते हैं। काली पूजा के दौरान भक्ति-कीर्तन, संथाली दशाय नाच, सांस्कृतिक कार्यक्रम और संथाली जात्रा व मेला आयोजित होता है।
महेशपुर. अमलादही गांव स्थित मां काली मंदिर श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है. हर वर्ष काली पूजा पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, मानते हैं कि मां उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं, जिसके बाद वे आभूषण चढ़ाकर आभार व्यक्त करते हैं. स्थानीय काली पूजा समिति के अनुसार, मां काली की पूजा विश्वनाथ भगत ने शुरू की थी, जिसके बाद पूरे गांव ने मिलकर इसे भव्य रूप दिया. लगभग 32 वर्ष पूर्व, पाकुड़िया निवासी शिवदत्त भगत की माता की मनोकामना पूरी होने पर उन्होंने कोलकाता से मां काली की शिलामूर्ति मंगवाकर स्थापित कराई. पुरोहित मोहनलाल मिश्रा मंदिर में पूजा करते हैं. निशा पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें बिहार, पश्चिम बंगाल और आसपास के जिलों से श्रद्धालु आते हैं. काली पूजा के पहले दिन भक्ति-कीर्तन और संथाली दशाय नाच, तथा दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पश्चिम बंगाल के कलाकारों द्वारा संथाली जात्रा व मेला का आयोजन होता है.
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