सीमलढाब की पेयजल समस्या के समाधान को प्रशासन सक्रिय
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 31 May 2026 5:57 PM
पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा प्रखंड के आदिम जनजाति बहुल सीमलढाब गांव में पेयजल समस्या को नियंत्रित करने जिला प्रशासन ने स्थलीय निरीक्षण किया। संथाल टोला और पहाड़िया टोला के परिवारों की जल जरूरतों और स्थानीय निर्माणाधीन आवासीय योजनाओं की समीक्षा की गई। वन क्षेत्र के कारण पहाड़िया टोला में चापाकल लगाने में तकनीकी अड़चनें आईं। समाधान के लिए सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति और संथाल टोला से पाइपलाइन के दो विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। प्रशासन ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
डीसी सहित अधिकारियों ने दुर्गम स्थल का किया निरीक्षण संवाददाता, पाकुड़ लिट्टीपाड़ा प्रखंड के आदिम जनजाति बहुल गांव सीमलढाब में पेयजल समस्या को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है. उपायुक्त मेघा भारद्वाज के निर्देश पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अनंत प्रसाद की टीम और बीडीओ संजय कुमार ने गांव पहुंचकर स्थल निरीक्षण किया तथा समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रस्ताव तैयार किया. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि गांव में संथाल टोला और पहाड़िया टोला सहित दो बस्तियां हैं. संताल टोला में लगभग 35 परिवार निवास करते हैं, जहां तीन चापाकल कार्यरत हैं. वहीं गांव से करीब एक किलोमीटर दूर वन क्षेत्र के भीतर स्थित पहाड़िया टोला में 12 आदिम जनजातीय परिवार रहते हैं. उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा, “दूरस्थ और आदिम जनजाति बहुल क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है. प्रस्तावित योजनाओं का शीघ्र तकनीकी मूल्यांकन कर ग्रामीणों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा. ” अधिकारियों ने बताया कि पहाड़िया टोला के निकट एक पहाड़ी नदी बहती है, जिसमें वर्तमान में पर्याप्त जल उपलब्ध है और ग्रामीण दैनिक जरूरतों के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं. निरीक्षण में यह भी सामने आया कि सभी परिवारों को आवासीय योजनाओं का लाभ दिया गया है तथा कई आवास निर्माणाधीन हैं. ग्रामीणों ने पहाड़िया टोला में चापाकल लगाने की मांग रखी, लेकिन तकनीकी जांच में पाया गया कि वहां तक पहुंचने के लिए वन क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है और कोई सुगम सड़क उपलब्ध नहीं है. इससे बोरिंग मशीन और अन्य भारी उपकरण पहुंचाना संभव नहीं है. समस्या के समाधान के लिए विभाग ने दो विकल्प सुझाए हैं. पहले विकल्प में नदी में लघु इंटेक वेल बनाकर सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति प्रणाली स्थापित की जाएगी. दूसरे विकल्प में संथाल टोला के पूर्वी छोर पर डीप बोरिंग और जलमीनार बनाकर पाइपलाइन के माध्यम से पहाड़िया टोला तक पानी पहुंचाया जायेगा.
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