जाति, धर्म नहीं कर्म से होती है पहचान : लक्ष्मी रानी जी

Updated at : 27 Dec 2016 5:33 AM (IST)
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जाति, धर्म नहीं कर्म से होती है पहचान : लक्ष्मी रानी जी

राम कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ हिरणपुर : कोई भी जाति व धर्म बड़ा नहीं होता है. कर्म ही श्रेष्ठ होता है, इससे ही मानव की पहचान होती है. उक्त बातें दुर्गा मंदिर में आयोजित राम चरित मानस कथा में प्रवचन देते हुए मानस मंजरी लक्ष्मी रानी जी ने कही. उन्होंने कहा कि रामकथा […]

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राम कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

हिरणपुर : कोई भी जाति व धर्म बड़ा नहीं होता है. कर्म ही श्रेष्ठ होता है, इससे ही मानव की पहचान होती है. उक्त बातें दुर्गा मंदिर में आयोजित राम चरित मानस कथा में प्रवचन देते हुए मानस मंजरी लक्ष्मी रानी जी ने कही. उन्होंने कहा कि रामकथा में वर्णित है कि माता-पिता, गुरू व संत का जीवन में विशेष महत्व है, इसलिए सभी पूजनीय है.
शराबी कभी समाज में आदरणीय नहीं हो सकता है. इसलिए नशा से सभी को दूर रहना चाहिए. वहीं वाचिका राधा रानी जी ने रामायण में भरत को श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि गुरूभक्ति की अनुकरणीय मिसाल भरत ने प्रस्तुत की. जो बड़े भाई राम की खड़ाउं को शिरोधार्य कर पूजा करते रहे. राम कथा सुनने को लेकर, तोड़ाई, हिरणपुर, सुंदरपुर, हाथकाठी, कमलघाटी सहित आस-पास के क्षेत्र से काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. मौके पर समिति के अध्यक्ष सहदेव साहा, परशुराम साहा, दीपक साहा, सूरज सेन आदि सक्रिय भूमिका में लगे रहे.
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