सीतपुर गरम झरने में जुटने लगी सैलानियों की भीड़
Updated at : 15 Dec 2016 3:58 AM (IST)
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मकर संक्रांति को जुटते हैं हजारों श्रद्धालु, लगता है मेला साफाहोड़ आदिवासियों का भी आस्था का केंद्र पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हो पाया गरम कुंड पाकुड़िया : ठंड के दस्तक देते ही प्रखंड के सीतपुर स्थित प्रकृति की गोद में बसा गरम झरना कुंड का लुत्फ उठाने लोगों की भीड़ उमड़ रही […]
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मकर संक्रांति को जुटते हैं हजारों श्रद्धालु, लगता है मेला
साफाहोड़ आदिवासियों का भी आस्था का केंद्र
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हो पाया गरम कुंड
पाकुड़िया : ठंड के दस्तक देते ही प्रखंड के सीतपुर स्थित प्रकृति की गोद में बसा गरम झरना कुंड का लुत्फ उठाने लोगों की भीड़ उमड़ रही है. प्रखंड मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस कुंड में ठंडी के दिनों में दिनभर लोगों की भीड़ स्नान करने जुट रही है. लोगों का मानना है कि इस कुंड में स्नान करने से चर्म रोग ठीक हो जाता है. इस कुंड की मान्यता दूर-दूर तक फैली है. काफी संख्या में पर्यटक अन्य दिन भी यहां पहुंचते हैं. नव वर्ष के आगमन पर भी दूर-दूर से काफी संख्या में पर्यटक मनोरंजन के लिए यहां पहुंचते हैं.
सीतपुर गरम कुंड में स्नान करते लोग.
आस्था का केंद्र है गरम कुंड
यहां बता दें कि यह गरम कुंड प्रखंडवासियों के लिए आस्था का केंद्र भी है. इस गरम कुंड स्थल पर मकर संक्रांति के दिन हजारों की संख्या में आदिवासी साफाहोड़, प्रखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, असम से भी पहुंचते हैं और इस कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं. 14 जनवरी को इस स्थल पर भव्य मेला का आयोजन होता है. जिसका लोग खूब आनंद उठाते हैं.
पर्यटन स्थल बनाने को लेकर नहीं हुई पहल
गरम कुंड को अगर पर्यटन स्थल का दरजा मिले तो इससे प्रशासन को अच्छा राजस्व भी मिलता और जिले को अलग पहचान मिलती. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा कुंड स्थल के समीप रैन बसेरा, शौचालय, महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम, शेड आदि का निर्माण कराये जाने से इस स्थल की थोड़ी रौनक बढ़ी है. परंतु इसे पूर्ण रूप से पर्यटन स्थल बनाये जाने का सही प्रयास नहीं किया गया है. यहां न तो बिजली की व्यवस्था है और न ही यहां तक पहुंचने के लिए सड़क की व्यवस्था. सड़क की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां आनेवाले पर्यटकों को थोड़ी परेशानी होती है. लोगों को इस जगह के पर्यटन स्थल बनने का इंतजार है.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
उपविकास आयुक्त अजीत शंकर ने कहा कि गरम कुंड के सौंदर्यीकरण को लेकर प्रशासन पहल कर रही है. उपरोक्त कुंड के विकास के लिए पर्यटन विभाग को रिपोर्ट भेजी गयी है.
देखरेख के अभाव में बंद हो गये छह कुंड
लोगों का मानना है कि कभी इस स्थल पर सात कुंड हुआ करता था. परंतु देखरेख के अभाव में छह कुंड बंद हो गये. अभी केवल एक गरम कुंड बच गया है. इस कुंड की घेराबंदी पूर्व विधायक मिस्त्री सोरेन की निधि से करायी गयी थी. स्थानीय लोगों की मानें तो अगर प्रशासन इस कुंड की देखरेख की उचित व्यवस्था करती तो आज यहां सातों कुंड खुले रहते जो लोगों को ज्यादा आकर्षित करते.
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