सरकारी पाठशाला आज बन गयी पाकशाला
Updated at : 19 Apr 2015 9:44 AM (IST)
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पाकुड़ : जिला मुख्यालय के रवींद्र नगर भवन में झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन पाकुड़ शाखा द्वारा शनिवार को वर्तमान परिवेश में निजी विद्यालय की भूमिका विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन एसोसिएशन के राज्याध्यक्ष श्रीकांत झा, एसडीओ विद्यानंद शर्मा पंकज, कमलेश्वरी प्रसाद सिंह ने संयुक्त रूप से किया. इस दौरान निजी विद्यालयों […]
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पाकुड़ : जिला मुख्यालय के रवींद्र नगर भवन में झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन पाकुड़ शाखा द्वारा शनिवार को वर्तमान परिवेश में निजी विद्यालय की भूमिका विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन एसोसिएशन के राज्याध्यक्ष श्रीकांत झा, एसडीओ विद्यानंद शर्मा पंकज, कमलेश्वरी प्रसाद सिंह ने संयुक्त रूप से किया.
इस दौरान निजी विद्यालयों की वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में भूमिका विषय पर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों सहित स्थानीय शिक्षाविदों ने अपना विचार रखा.
एसोसिएशन के राज्याध्यक्ष श्रीकांत झा ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में री-एडमिशन शुल्क के नाम पर हंगामा हो रहा है, जबकि गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय री-एडमिशन शुल्क नहीं लेते. मान्यता प्राप्त झारखंड के सभी जिलों के कुछ नामी गिरामी विद्यालयों द्वारा री-एडमिशन शुल्क लिये जाते हैं और पूरा का पूरा निजी विद्यालय को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
निजी विद्यालय पर पैनी नजर रखने वाले अधिकारी और मंत्री तक के बेटे व रिश्तेदार सरकारी विद्यालयों में कम और निजी विद्यालयो में ज्यादा पढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय के संचालकों एवं विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों को गुणवत्ता आधारित शिक्षा, बच्चों का शत प्रतिशत ठहराव के लिए अभियान नहीं चलाना पड़ रहा है. जबकि लाखों रुपये खर्च कर सरकार आज विद्यालय चलें-चलायें अभियान चला रही है.
श्री झा ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में सरकारी पाठशाला पाकशाला बन गयी है. पहले खिचड़ी और अब अंडा खिला देने से शैक्षणिक माहौल में बदलाव और शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि नहीं होगी. उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय में बच्चों को संस्कार शिक्षा के साथ साथ अन्य सुविधाएं भी मिल रही है और ठीक इसके विपरीत सरकारी विद्यालयों में शौचालय है तो पानी की कमी का रोना पड़ रहा है. हम शिक्षा अधिकार अधिनियम का अनुपालन करते हुए बेहतर शिक्षा बच्चों को देने का काम कर रहे है. यदि हमारा दावा गलत है तो सरकार सरकारी विद्यालयों के बगल में ही एक निजी विद्यालय के पठन पाठन सहित शैक्षणिक गुणवत्ता की तुलना कर ले परिणाम अपने आप समझ में आ जायेगा.
मौके पर अधिवक्ता बद्री प्रसाद तिवारी, कमलेश्वरी प्रसाद सिंह, त्रिवेणी प्रसाद भगत, समीर कुमार दुबे, करुण कुमार राय, विपिन कुमार सिंह, सेवानिवृत्त व्याख्यता मनमोहन मिश्र ने भी अपना विचार रखा. सेमिनार में रामरंजन सिंह ने सचिव का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया. धन्यवाद ज्ञापन एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने किया. कार्यक्रम में रीतू किस्कू, रीमी डे, सुमित दास, निवेदिता आदि ने गीत व नृत्य भी प्रस्तुत किया.
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