इतिहास बदलने के लिए भाजपा की चुनौती का सामना कर रहे झामुमो उम्मीदवार, जानें महेशपुर विधानसभा क्षेत्र का लेखा-जोखा

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date

रमेश भगत

कुल वोटर

216465

पुरुष वोटर

107979

महिला वोटर

108486

पाकुड़ : देवीधन बेसरा को छोड़ कर महेशपुर विधानसभा चुनाव में अब तक कोई एक उम्मीदवार लगातार दूसरी बार विधायक नहीं बन सके हैं. 1962 के विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के चुनाव परिणाम के विश्लेषण से यह साफ हो जाता है कि क्षेत्र की जनता ने लगातार प्रत्याशी बदलते रहे हैं.

हमेशा किसी दूसरे प्रत्याशी को अपना नेता चुना है. 2019 के विधानसभा चुनाव में झामुमो के स्टीफन मरांडी इतिहास बदलने को बेताब हैं. लेकिन उनकी हर तैयारी से एक कदम आगे निकलने को भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मिस्त्री सोरेन भी प्रयासरत हैं. मिस्त्री सोरेन भी साल 2009 में महेशपुर विधानसभा से जेवीएम के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं. लेकिन उन्हें भी लगातार दूसरी बार जनता का आशीर्वाद नहीं मिल पाया. महेशपुर सीट से देवीधन बेसरा ही अकेले प्रत्याशी हैं, जो दो बार (1980 व 1985) झामुमो के टिकट पर लगातार जीते थे.

वहीं दो बार हार के बाद देवीधन बेसरा जब भाजपा के टिकट से लड़ें तो भी हार गये. महेशपुर विधानसभा में अन्य दल भी अपना दांव आजमा रहे हैं, जो कि किसी भी चुनावी गणित को बनाने-बिगाड़ने में काफी है. जिसमें झामुमो से विधायक रह चुके सुफल मरांडी आजसू के टिकट पर मैदान में है. वहीं झारखंड विकास मोर्चा ने शिवधन हेंब्रम को अपना प्रत्याशी बनाया है.

तीन महत्वपूर्ण कार्य जो हुए

1. महेशपुर कॉलेज का शिलान्यास

2. तीन पावर सब स्टेशन का शिलान्यास

3. ब्राह्मनी नदी पर पुल का निर्माण

तीन महत्वपूर्ण कार्य जो नहीं हुए

1. महेशपुर नहीं बन सका अनुमंडल

2. आइटीआइ कॉलेज में पढ़ाई शुरू नहीं

3. 50 बेड के अस्पताल का नहीं हुआ निर्माण

विकास ही विकास हुआ है : स्टीफन

पिछले पांच सालों में महेशपुर विधानसभा में विकास ही विकास हुआ है. इस दौरान 150 किमी पीडब्ल्यूडी सड़क, 350 किमी आरइओ सड़क, 35 तालाब, पांच बड़ा पुलिया सहित अन्य कई काम किया गया.

विकास से वंचित है इलाका : मिस्त्री

तीसरे स्थान पर रहे मिस्त्री सोरेन ने कहा कि पांच सालों में महेशपुर में एक भी पीडब्ल्यूडी सड़क का निर्माण नहीं हुआ. पुल-पुलिया का भी निर्माण नहीं हुआ है. पाकुड़िया के गर्म-पानी मेला को दर्शनीय स्थल बनाया जा सकता है. लेकिन इसके लिए भी कोई पहल नहीं की गयी.

वहीं भौरीकोचा मंदिर का भी विकास नहीं हो पाया.

2005

जीते : सुफल मरांडी, झामुमो

प्राप्त मत : 45520

हारे : देवीधन बेसरा, भाजपा

प्राप्त मत : 32704

तीसरा स्थान : मिस्त्री सोरेन, आजसू

प्राप्त मत : 13812

2009

जीते : मिस्त्री सोरेन, झाविमो

प्राप्त मत : 50746

हारे : देवीधन टुडू, भाजपा

प्राप्त मत : 28772

तीसरा स्थान : दुर्गा मरांडी, तृणमूल कांग्रेस

प्राप्त मत : 15840

2014

जीते : स्टीफन मरांडी, झामुमो

प्राप्त मत : 51866

हारे : देवीधन टुडू, भाजपा

प्राप्त मत : 45710

तीसरा स्थान : मिस्त्री सोरेन, झाविमो

प्राप्त मत : 31276

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