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सामुदायिक भवन निर्माण कार्य को ग्रामीणों ने कराया काम बंद

ज़िले के सेन्हा प्रखंड क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

कृष्ण कुमार मिश्र सेन्हा-लोहरदगा : लोहरदगा ज़िले के सेन्हा प्रखंड क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि यहां विकास कार्यों में लूट की खुली छूट मिली हुई है. निर्माण कार्य शुरू होते ही टूटने लगते हैं और संबंधित विभाग के इंजीनियर निरीक्षण करने के बजाय संवेदकों को जैसे-तैसे काम पूरा करने में सहयोग करते हैं. ताज़ा मामला सेन्हा प्रखंड के आदिवासी मुहल्ला सेन्हा का है, जहां सिंचाई विभाग द्वारा अनावध निधि योजना के तहत 28 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा है. इस कार्य के संवेदक कुणाल कुमार यादव बताये जाते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य बिल्कुल ही घटिया स्तर का किया जा रहा है. ईंट और चिप्स की गुणवत्ता बेहद खराब है, सीमेंट भी घटिया क्वालिटी का लगाया जा रहा है और छड़ स्थानीय स्तर की है. ग्रामीणों ने कई बार संवेदक से सामग्री बदलने की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गयी. इसके बाद ग्रामीणों ने जिला परिषद सदस्य राधा तिर्की से शिकायत की. निरीक्षण के दौरान उन्होंने घटिया ईंट और चिप्स देखकर नाराज़गी जतायी और तुरंत इन्हें हटाने का निर्देश दिया. साथ ही उन्होंने संवेदक को प्राक्कलन के अनुरूप कार्य करने और ईंट सोलिंग जमीन को पानी से दहलाने का आदेश दिया. जिप सदस्य ने स्पष्ट कहा कि यह भवन ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पर स्वीकृत हुआ है. यदि निर्माण घटिया होगा तो इसका नुकसान सभी को उठाना पड़ेगा. उन्होंने कनीय अभियंता को काम की निगरानी करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. ग्रामीणों ने भी काम को बंद करा दिया है और उपायुक्त को लिखित शिकायत देने की तैयारी कर रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि इंजीनियर कभी भी निर्माण स्थल का निरीक्षण नहीं करते. यह तो केवल एक उदाहरण है, पूरे प्रखंड क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में तो स्थिति और भी खराब है, जहां निर्माण कार्य शुरू होते ही टूटने लगते हैं. इस तरह की लापरवाही से आम जनता में रोष बढ़ता जा रहा है. सरकारी धन की बर्बादी हो रही है और योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और विभागीय अधिकारी समय रहते सख्त कदम नहीं उठाते, तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज़ होगा.

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