जिले के मध्य विद्यालय में एक भी संस्कृत के शिक्षक नहीं

Updated at : 24 Feb 2025 9:10 PM (IST)
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जिले के मध्य विद्यालय में एक भी संस्कृत के शिक्षक नहीं

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से अगले महीने मार्च में आठवीं बोर्ड की परीक्षा होनी है. इसमें संस्कृत की परीक्षा भी ली जानी है.

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गढ़वा. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से अगले महीने मार्च में आठवीं बोर्ड की परीक्षा होनी है. इसमें संस्कृत की परीक्षा भी ली जानी है. गढ़वा जिले में प्राथमिक व मध्य विद्यालयों को मिलाकर 1450 से ज्यादा सरकारी विद्यालय हैं. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि जिले में एक भी संस्कृत विषय के जानकार शिक्षक नहीं है. ऐसे में बिना संस्कृत विषय पढ़े ही बच्चे आठवीं बोर्ड की परीक्षा लिखने के लिए बाध्य होंगे. यहां यह भी गौरतलब है कि झारखंड सरकार की ओर से प्रत्येक साल नि:शुल्क रूप से मध्य विद्यालय (छठी से आठवीं तक) के विद्यार्थियों के बीच सुभाषिका नामक संस्कृत विषय की पुस्तक का वितरण किया जाता है. प्रत्येक सप्ताह झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रांची की ओर से रेग्यूलर एसेस्टमेंट फॉर इंप्रुवड लर्निंग (रेल) के तहत आठवीं तक के विद्यार्थियों की विभिन्न विषयों की परीक्षा भी ली जाती है, जिसके अंक को वार्षिक परीक्षाफल में शामिल किया जाता है. इस साप्ताहिक रेल परीक्षा में संस्कृत विषय की भी परीक्षा ली जा रही है. वैसी स्थिति में जब जिले में एक भी संस्कृत विषय के जानकार शिक्षक नहीं हैँ, जो बच्चों को इसका बेसिक नॉलेज भी सीखा सकें, तो विद्यार्थी प्रत्येक सप्ताह इस विषय में क्या परीक्षा देते होंगे, यह समझा जा सकता है. यहां यह जानना जरूरी है कि इन विद्यालयों में भाषा विषय के ही शिक्षकों की बहाली ली जाती है. इसी में हिंदी, उर्दू, अरबी, संस्कृत आदि शामिल है. गढ़वा जिले के मध्य विद्यालयों में हिंदी, उर्दू के साथ ही अरबी भाषा के शिक्षक हैं, लेकिन संस्कृत विषय के शिक्षक नहीं हैं. उच्च विद्यालय व प्लस टू में हैं संस्कृत के कुछ शिक्षक

मध्य विद्यालयों में भले बच्चे शिक्षक के अभाव में बिना संंस्कृत पढ़े पास हो रहे हैं, लेकिन उच्च विद्यालय एवं प्लस टू विद्यालयों में संस्कृत के शिक्षकों की बहाली ली गयी है. गढ़वा जिले में 122 उच्च विद्यालय हैं, जिनमें से 107 में संस्कृत भाषा के शिक्षक का पद सृजित है, इनमें से 39 शिक्षक कार्यरत हैं. जबकि 68 पद रिक्त पड़े हुये हैं. जबकि जिले के 38 प्लस टू विद्यालयों में से 23 में संस्कृत भाषा के शिक्षकों का पद सृजित है, जिनमें से 16 सेवारत हैं और सात पद रिक्त पड़े हुए हैं. लेकिन यहां गौरतलब है कि जब प्राथमिक व मध्य विद्यालय स्तर पर ही बच्चों को संस्कृत की बेसिक जानकारी नहीं मिल पा रही है, तो आगे की कक्षा में वे कैसे इस विषय में दक्ष हो पायेंगे.

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