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Success Story: जंगल से लकड़ी लाकर बाजार में बेचनेवाली सीता देवी की चमकी किस्मत, खेतीबाड़ी कर बन गयीं लखपति?

Updated at : 16 Mar 2025 3:28 PM (IST)
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Sita Devi lakhpati didi lohardaga

महिला किसान सीता देवी

Success Story: लोहरदगा की सीता देवी की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. परिवार चलाने के लिए वह जंगल से लकड़ी लाकर बाजार में बेचती थीं. वर्ष 2015 में महिला मंडल से जुड़ने के बाद उनकी किस्मत बदल गयी. खेतीबाड़ी कर वह लखपति बन गयी हैं.

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Success Story: सेन्हा (लोहरदगा)-एक वक्त था, जब सीता देवी जंगल से लकड़ी लाकर बाजार में बेचती थीं और परिवार का भरण-पोषण करती थीं. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. वर्ष 2015 में वह महिला मंडल से जुड़ीं और खेतीबाड़ी की ट्रेनिंग लेकर सब्जी की खेती करने लगीं. अच्छा मुनाफा से उनका हौसला बढ़ा और फिर बड़े स्तर पर खेती करने लगीं. अब वह सालाना तीन लाख रुपए कमा रही हैं.

आलू की खेती से हुआ 90 हजार का मुनाफा


लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड की अलौदी पंचायत के गढ़गांव निवासी कुंवर सिंह की पत्नी सीता देवी की किस्मत खेतीबाड़ी से बदल गयी. आज इलाके में इनकी अपनी पहचान है. इनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय थी. परिवार के भरण-पोषण के लिए सीता देवी जंगल से लकड़ी लाकर बाजार में बेचती थीं. जब गांव में महिला मंडल का गठन हुआ, तो वर्ष 2015 में रौनक महिला मंडल से जुड़ीं और जेएसएलपीएस के माध्यम से खेती का प्रशिक्षण लीं. 30 हजार रुपए कर्ज लेकर उन्होंने आलू की खेती की. इससे सीता देवी को 90 हजार का मुनाफा हुआ. अब वह जंगल से लकड़ी लाकर बेचने का काम छोड़ दीं और खेतीबाड़ी के काम में ही रम गयीं.

सब्जी की खेती से लखपति बन गयीं सीता देवी


सीता देवी आलू, बैंगन, गोभी, टमाटर, सेम, फ्रेंचबीन, मटर और मकई की खेती करती हैं और स्थानीय बाजार के अलावा गुमला, घाघरा, लोहरदगा समेत अन्य बाजारों में सब्जी बेचती हैं. इससे वह सालाना 2 से 3 लाख रुपए कमा रही हैं. गढ़गांव जैसा पहाड़ी गांव, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, वहां खेतीबाड़ी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करनेवाली सीता देवी अपने गांव के अलावा आसपास के लोगों के लिए मिसाल बन गयी हैं.

2015 से पहले घर की आर्थिक स्थिति थी काफी खराब


सीता देवी बताती हैं कि वर्ष 2015 से पहले घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. घर का गुजारा करने के लिए वह जंगल से लकड़ी लाकर बाजार में बेचती थीं, लेकिन जब गांव में महिला मंडल का गठन हुआ, तो उससे जुड़ कर वह कर्ज लीं और जेएसएलपीएस के जरिए खेती की ट्रेनिंग लीं. करीब तीन एकड़ में खेतीबाड़ी कर अच्छे से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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