हुजूर कम से कम पानी तो उपलब्ध करा दीजिये

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हुजूर कम से कम पानी तो उपलब्ध करा दीजिये

सरकार ने हर घर नल योजना की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि देश के प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचे, लेकिन परहेपाठ पंचायत की स्थिति इस योजना की वास्तविकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है.

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तीन वर्ष से अधिक समय से खराब पड़ा है वाटर ट्रीटमेंट प्लांट

संदीप साहु किस्को.लोहरदगा.

सरकार ने हर घर नल योजना की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि देश के प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचे, लेकिन परहेपाठ पंचायत की स्थिति इस योजना की वास्तविकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है. यहां हजारों ग्रामीण आज भी शुद्ध पानी से वंचित हैं और तालाब का गंदा पानी पीने को विवश हैं.

पंचायत क्षेत्र में किस्को आवासीय विद्यालय के समीप करोड़ों की लागत से ग्राम जल स्वच्छता समिति द्वारा संचालित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था. यह प्लांट तीन वर्ष से अधिक समय से खराब पड़ा है. चुनाव के समय इसे अस्थायी रूप से दुरुस्त किया गया था, लेकिन मात्र 15 दिन बाद ही फिर से बंद हो गया. परिणामस्वरूप किस्को, गोसाई टोली और जनवल जैसे गांवों के हजार से अधिक घरों तक पानी की आपूर्ति ठप हो गयी.

ग्रामीणों का कहना है कि पीएचडी विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई. पंचायत चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार की चेतावनी दी थी, तब जाकर थोड़े समय के लिए पानी की आपूर्ति शुरू की गयी. परंतु चुनाव बीतते ही विभाग ने ध्यान देना बंद कर दिया.

गाँव की महिलाएं सुबह होते ही पानी की तलाश में निकल जाती हैं. मैनपति कुमारी, सत्यभामा देवी, सुषमा देवी, रानी फूलकुमारी, मंकुमारी, खुसबू, संपति, सोनिका, गुलाबो, रहमानिया, फुलवा, सीमा कर्मी और शिल्पी समेत कई महिलाओं ने बताया कि गोसाई टोली गांव में पानी की भारी किल्लत है. पंचायत से सटे गांव होने के बावजूद उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिल रहा. महिलाओं ने पंचायत भवन का घेराव भी किया, लेकिन प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखायी.

ग्रामीण सुखदेव रजवार, देवानंद साहू, गोविंदा सिंह, बाशुदेव उरांव और पंडित राम का कहना है कि पानी की समस्या को लेकर लोग दर-दर भटक रहे हैं. तालाब का गंदा पानी पीने से स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है.

पंचायत क्षेत्र में अन्य जलमीनार भी खराब पड़े हैं. पाइपलाइन का काम घटिया तरीके से किया गया है. कई जगह पाइपलाइन बिछाई ही नहीं गयी और जहां बिछाई गयी, वहां भी कुछ महीनों में खराब हो गयी. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल रहा.

पंचायत के मुखिया जतरू उरांव का कहना है कि पीएचडी विभाग से लगातार आग्रह किया जा रहा है. मौखिक और लिखित दोनों तरीकों से मांग की गई है. जिला परिषद से सफल संचालन के लिए एग्रीमेंट भी हो चुका है. जल्द ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को दुरुस्त कर पानी की सप्लाई शुरू करने का आश्वासन दिया गया है.

गर्मी के आगमन के साथ ही पेयजल संकट और विकराल हो रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजना केवल कागजों पर ही सफल है. वास्तविकता में विभाग की लापरवाही और घटिया कार्यप्रणाली के कारण लोग आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं.

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Vikash Nath

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