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तपती गर्मी में कुड़ू के लोग पानी के लिए हो रहे पानी-पानी

Updated at : 13 Jun 2024 5:40 PM (IST)
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तपती गर्मी में कुड़ू के लोग पानी के लिए हो रहे पानी-पानी

तपती गर्मी के कारण जहां जलस्रोत जबाब दे रहे हैं, तो शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पीने के पानी के लिए पानी - पानी हो रहें हैं.

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कुड़ू. तपती गर्मी के कारण जहां जलस्रोत जबाब दे रहे हैं, तो शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पीने के पानी के लिए पानी – पानी हो रहें हैं. चूल्हापानी से लेकर ककरगढ़ तक तथा टिको रजगुरूवा से लेकर नामनगर तक पेयजल की गम्भीर समस्या उत्पन्न हो गयी है, लेकिन तपती गर्मी में ग्रामीणों की प्यास बुझाने को लेकर ना तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों ना ही प्रशासनिक अधिकारी कोई पहल कर पा रहे हैं, नतीजतन चापानल पर पानी लेने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है. बताया जाता है कि प्रखंड के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को लेकर प्रखंड के 14 पंचायतों में 14 वें तथा 15 वें वित्त आयोग की राशि से पूरे प्रखंड क्षेत्र में लगभग 55 सोलर आधारित जलमीनार लगायी गयी थी, इसमें कहीं सोलर पैनल गायब है तो कहीं मशीन में आयी तकनीकी गड़बड़ी के कारण सोलर आधारित जलमीनार हाथी का दांत बना हुआ है. हर घर नल-जल योजना के तहत प्रखंड में पच्चीस से लेकर चालीस मकानों तक शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को लेकर सोलर आधारित जलमीनार लगायी जा रही है, छह माह बाद भी प्रखंड क्षेत्र में कार्य पूरा नहीं हो पाया है, लेकिन चापानल में समरसेबल मशीन डालने के बाद चापानल से पेयजल निकालने के कार्य कर अंकुश लगा दिया गया है. पीएचइडी विभाग द्वारा प्रखंड में पेयजल के लिए लगभग 12 सौ चापानल लगाया गया था, इसमें चार सौ डेड एसेट बने हुए हैं तो लगभग दो सौ चापानल में सोलर आधरित जलमीनार के लिए समरसेबल मशीन लगाकर बेकार कर दिया गया है. शेष छह सौ चापानल है जिसमें दो सौ चालू हालत में हैं. प्रखंड की आबादी लगभग एक लाख है. एक लाख की आबादी को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए दो सौ चापानल नाकाफी साबित हो रहा है. कुआं का जलस्तर काफी नीचे चला गया है तो चापानल जबाब दे रहा है, इस हालत में ग्रामीण कैसे तपती गर्मी में प्यास बुझाये, गम्भीर सवाल बना हुआ है. सबसे अधिक परेशानी शहरी क्षेत्र के ग्रामीणों को हो रही है. नौ करोड़ की लागत से बना कुड़ू ग्रामीण जलापूर्ति योजना एक साल से ठप है.शहरी क्षेत्र के ग्रामीण अहले सुबह पांच बजे से दस बजे तक तथा शाम छह बजे से लेकर रात 9 बजे तक पानी ढोने को विवश हैं. कुड़ू वासियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को लेकर प्रखंड प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तथा स्थानीय विधायक सह मंत्री से लेकर सांसद तक चुप्पी साधे हुए हैं. इस संबंध में बीडीओ प्रवेश कुमार साव ने बताया कि पेयजल की समस्या को लेकर पीएचईडी विभाग से बात हुई है. पेयजल की समस्या नहीं होने दी जायेगी. कुड़ू ग्रामीण जलापूर्ति योजना को चालू कराने का प्रयास शुरू किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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