फाइलेरिया से बचाव के लिये दवा खिलायी गयी

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फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत सिविल सर्जन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से मंगलवार को जनहित में फाइलेरिया बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा प्रखंड क्षेत्र में सभी जगहों में बूथ बना कर फाइलेरिया की दवा खिलायी गयी.

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सेन्हा. फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत सिविल सर्जन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से मंगलवार को जनहित में फाइलेरिया बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा प्रखंड क्षेत्र में सभी जगहों में बूथ बना कर फाइलेरिया की दवा खिलायी गयी. स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा लोगों को जागरूक करते हुए फाइलेरिया बीमारी से बचाव के लिये एल्बेंडाजोल की दवा दी गयी. वहीं फाइलेरिया बीमारी का पहचान व बचाव से संबंधित जानकारी भी दी गयी. स्वास्थ कर्मियों ने कहा कि परजीवी मच्छरों के काटने से फाइलेरिया बीमारी होता है.जो 15 वर्ष बाद पता चलता है. फाइलेरिया के संबंध में बताया गया कि पैर फूल कर हाथी पांव बन जाता है. यह बीमारी शरीर के विभिन्न अंगों के अलावे हाइड्रोसिल में भी होता है.फाइलेरिया बीमारी से बचाव के लिये साल में एक बार सभी लोगों को दवा खाना चाहिये. परन्तु किसी व्यक्ति को फाइलेरिया बीमारी होने से लगातार सात साल तक दवा खाने पर इस बीमारी से छुटकारा मिलता है.वही प्रखंड क्षेत्र के सभी स्वास्थ्य उप केंद्र और आंगनबाड़ी तथा अन्य जगहों में स्वस्थ्य सहिया, आंगनबाड़ी सेविकाएं और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा फाइलेरिया से बचाव के लिये एल्बेंडाजोल की दवा खिलायी गयी. मौके पर स्वास्थ्य सहिया शकुंतला देवी, एमपीडब्लू अनुज सिन्हा, मंसूर अंसारी, गन्दूर उरांव सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी व आंगनबाड़ी सेविकाएं उपस्थित थे.

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