महाशिवरात्रि आस्था, साधना, आत्मजागरण और आध्यात्मिक उन्नति का पावन पर्व

महाशिवरात्रि आस्था, साधना, आत्मजागरण और आध्यात्मिक उन्नति का पावन पर्व
लोहरदगा़ महाशिवरात्रि का पावन पर्व जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण इलाकों में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जायेगा. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को होने वाले इस आयोजन को लेकर लोहरदगा के शिवालय सज-धज कर तैयार हैं. जिले के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और भव्य भंडारे की व्यापक तैयारी की गयी है. विशेष रूप से लोहरदगा के ऐतिहासिक खखपरता शिव मंदिर में विशेष पूजा और भव्य मेले का आयोजन होगा. प्राचीन शिल्पकला और आस्था का केंद्र : पुरातात्विक प्रमाणों के अनुसार, जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर 11वीं शताब्दी में लिंगायत संप्रदाय द्वारा निर्मित किया गया था. रमणीक प्राकृतिक छटा और शिलाओं पर उकेरी गयी प्राचीन कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध इस स्थान पर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है. मान्यता है कि यहां कण-कण में शिव का वास है. शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है यह महापर्व : महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. यह दिन शिव और शक्ति के एकत्व का प्रतीक है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए समुद्र मंथन से निकले ””””हलाहल”””” विष को ग्रहण किया था. साथ ही, इसी रात्रि भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे. महाशिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है भगवान शिव की महान रात्रि. यह दिन भगवान शिव की आराधना, उपवास, जप, तप और ध्यान के लिए समर्पित माना जाता है. निकलेगी भव्य शिव बारात, भक्ति में डूबेगा शहर : लोहरदगा में महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य शिव बारात भी निकाली जायेगी. इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे. शहर में जगह-जगह तोरण द्वार लगाये गये हैं. श्रद्धालु दिन भर उपवास रखकर शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करेंगे. रात भर जागरण, भजन-कीर्तन और शिव पुराण का पाठ कर भक्त भगवान आशुतोष की आराधना करेंगे.
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