कैरो : प्रखंड का दर्जा मिले 12 वर्ष से अधिक हो गया, लेकिन सुविधा आज भी नहीं

Updated at : 09 Jun 2021 2:12 PM (IST)
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कैरो : प्रखंड का दर्जा मिले 12 वर्ष से अधिक हो गया, लेकिन सुविधा आज भी नहीं

इस समस्याओं के निदान के लिए क्षेत्र के लोग स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा चुके हैं. लेकिन इस ज्वलंत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है. नंदनी नदी पर बंडा गांव के समीप पुल निर्माण का कार्य 2007-08 में लगभग 85 लाख रुपये की लागत से प्रारंभ हुआ था. जबकि संवेदक द्वारा 58 लाख की निकासी भी कर ली गयी, परंतु निर्माण में सिर्फ पिलर खड़ा कर छोड़ दिया गया. और कार्य जस का तस बना हुआ है. पुल बन जाने से प्रखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय का

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कैरो प्रखंड क्षेत्र के कई ऐसे बड़ी योजना हैं, जो आज भी अधूरा है. कैरो प्रखंड का दर्जा मिले 12 वर्ष से अधिक हो चुका है. लेकिन आज भी कैरो प्रखंड की जनता बुनयादी समस्या झेलने को विवश हैं. कैरो प्रखंड की मुख्य समस्या कंदनी नदी पर बंडा के समीप अधूरा पुल, अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र, आईटीआई कॉलेज व छात्रावास का अधूरा व संचालन न होना है. तीन सबसे बड़ी योजना प्रखंड क्षेत्र की है, जो अधर पर लटकी है.

इस समस्याओं के निदान के लिए क्षेत्र के लोग स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा चुके हैं. लेकिन इस ज्वलंत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है. नंदनी नदी पर बंडा गांव के समीप पुल निर्माण का कार्य 2007-08 में लगभग 85 लाख रुपये की लागत से प्रारंभ हुआ था. जबकि संवेदक द्वारा 58 लाख की निकासी भी कर ली गयी, परंतु निर्माण में सिर्फ पिलर खड़ा कर छोड़ दिया गया. और कार्य जस का तस बना हुआ है. पुल बन जाने से प्रखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय का

दूरी मात्र 18 किमी तय करना पड़ती. परंतु कुडू भंडरा के रास्ते जिला मुख्यालय जाने पर कैरो प्रखंड वासियों की 32 किमी की दूरी तय करना पड़ती है. अगर पुल का निर्माण पूर्ण हो जाता, तो लोगों को जिला मुख्यालय जाने के लिए 14 किमी कम दूरी तय करनी पड़ती. साथ ही बरसात के दिनों में लोगों को नदी में घुस कर या कुडू-भंडरा के रास्ते जिला मुख्यालय जाना पड़ता है. दूसरी ओर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य 2010-11 मे एक करोड़ 11 लाख के लाग से शुरू हुआ,

जो आज तक अधूरा है. आज स्वास्थ्य केंद्र शरारती तत्वों का अड्डा बन गया है. तीसरी प्रखंड क्षेत्र के एडादोन कोयल नदी तट पर आईटीआई कॉलेज व छात्रावास का निर्माण दो कम्पनियों मां तारा कंस्ट्रक्शन व एक और कंपनी द्वारा चार करोड़ की लागत से की गयी थी. परंतु आज तक पढ़ाई प्रारंभ नहीं हुआ है. इन सभी समस्याओं का निदान कर लेने से प्रखंड वासियों को काफी सुविधा होगी.

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