पंचायत के लोग परेशान, डीसी से अनियमितता की जांच की मांग किस्को. किस्को प्रखंड क्षेत्र के उग्रवाद प्रभावित देवदरिया पंचायत में भ्रष्टाचार इन दिनों चरम पर है. पंचायत में 14वें और 15वें वित्त आयोग की राशि तथा मनरेगा सहित सभी प्रकार के कार्यों को नियम-कानून की अनदेखी करते हुए एक ठेकेदार/बिचौलिये को सौंप दिया गया है. कार्यों में भारी अनियमितता बरती जा रही है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है और यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. पंचायत के मुखिया और सचिव द्वारा विकास योजनाओं को खोखला करने का खेल चल रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कुर्सी, टेबल, दरी, कंप्यूटर, पर्दा और अन्य मशीनें जीएम पोर्टल से नहीं खरीदी गयीं, बल्कि स्थानीय बाजार से कम दाम पर खरीदकर अधिक राशि के वाउचर बनाये गये. जलमीनार योजना की मरम्मत में जहां वास्तविक खर्च 5 से 10 हजार रुपये हुआ, वहीं 50 से 60 हजार रुपये की निकासी कर ली गयी. ग्रामीणों का कहना है कि 15वें वित्त की राशि का लाभ पंचायत के लोगों को देने के बजाय सेन्हा प्रखंड के एक व्यक्ति को सभी काम सौंप दिये गये. कार्य घटिया स्तर पर कराये गये और अधूरे कामों के लिए भी पूरे बिल बनाकर भुगतान किया गया. पंचायत सचिव और मुखिया द्वारा योजनाओं में भारी अनियमितता की गयी है. ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधान सचिव और उपायुक्त को आवेदन देकर मांग की है कि पंचायत में 14वें और 15वें वित्त की राशि की बड़े पैमाने पर जांच की जाये. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को चुनौती देते हुए जैसे-तैसे काम किया और 22 अक्तूबर 2019 को रद्द हुए जीएसटी वाउचर से भी योजनाओं में भुगतान लिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं. योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचने के बजाय बिचौलियों और अधिकारियों की मिलीभगत से हड़प लिया जा रहा है. इस कारण क्षेत्र के लोग परेशान हैं और विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाये, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंच सके और पंचायत में पारदर्शिता स्थापित हो.
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