बारिश नहीं होने से झारखंड के गेहूं उत्पादक किसान परेशान, जयनगर में सिंचाई की सुविधा नहीं

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कोडरमा के जयनगर में बारिश नहीं होने से गेहूं उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ी. एआई जेनरेटेड फोटो

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Wheat Farmers Crisis: झारखंड के कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड में बारिश नहीं होने से गेहूं किसानों की चिंता बढ़ी. नदी, नाला और चेकडैम सूखने से सिंचाई संकट गहरा गया है. दाना भरने के समय नमी की कमी से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है. किसान बारिश और पटवन की आस लगाए हैं. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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जयनगर से राजेश सिंह की रिपोर्ट

Wheat Farmers Crisis: झारखंड के कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड के गेहूं उत्पादक किसानों की चिंता इन दिनों बढ़ी हुई है. इसका कारण यह है कि बारिश नहीं होने की वजह से गेहूं की फसल में दाने नहीं आएंगे. प्रखंड में सिंचाई के मात्र तीन ही साधन नदी, नाला और चेकडैम हैं, जो गर्मी आने के पहले से ही सूखने लगे हैं. ऐसे में किसानों के सामने गेहूं की लहलहाती फसल को बचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

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नालों के किनारे वाली फसलों में परेशानी

कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड के चरकी पहरी, डुमरडीहा, सोनपुरा, चक, चुटियारो, बिगहा, चेहाल, चंद्रपुर, सतडीहा, तिलोकरी, कंद्रपडीह, योगियाटिल्हा आदि क्षेत्र में किसानों ने उत्साह से गेहूं की फसल लगाई है. हालांकि, बराकर नदी के किनारे लगी गेहूं की फसल प्रगति पर है. मगर जहां भी नाला की बदौलत गेहू्ं की फसल लगाई गई है, वहां परेशानी बढ़ गई है.

मौसम दे रहा दगा : किसान

प्रखंड के चरकी पहरी के किसान बुलाकी यादव व कंद्रपडीह के किसान तिलक यादव ने बताया कि खेतों के आसपास नदी, नाला सूखने से परेशानी बढ़ गयी है. पहले जो पानी था, उससे पटवन हो गया, लेकिन अब जब जरूरत है पटवन की, तो पानी सूखने से संकट बढ़ गया है, नमी नहीं मिला, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है. एक बार अच्छी बारिश हो जाती, तो समस्या दूर हो सकती है, मगर मौसम ने दगा दिया है.

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पुष्ट बाली के लिए सिंचाई जरूरी है : रूपेश

कृषि विज्ञान केंद्र जयनगर कोडरमा के एग्रोफॉरेस्टी ऑफिसर रूपेश रंजन ने इस विषय में बताया कि अच्छी फसल लगी है, बालियां आ रही है और अब दाना भरेगा. ऐसे में सिंचाई जरूरी है. फसल की जड़ में नमी आने से गेहूं का दाना पुष्ट होगा और बेहतर फसल का उत्पादन होगा. उन्होंने बताया कि बेहतर फसल और उत्पादन के लिए पानी की व्यवस्था जरूरी है.

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