कुड़ू़ प्रखंड के अति पिछड़े सलगी पंचायत अंतर्गत धौरा गांव के ग्रामीणों के लिए विकास की बातें आज भी एक सपना बनी हुई है. जर्जर सड़क और बदहाल व्यवस्था के कारण इस गांव का संपर्क मुख्यधारा से पूरी तरह कट चुका है. मंगलवार को धौरा गांव में ””””प्रभात खबर आपके द्वार”””” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन, स्थानीय सांसद और विधायक के खिलाफ जमकर आक्रोश जाहिर किया. छह माह में पांच मौतें, सड़क बनी यमराज : ग्रामीणों ने बताया कि सलगी पंचायत सचिवालय से धौरा गांव की दूरी मात्र चार किलोमीटर है, लेकिन सड़क की हालत इतनी खस्ता है कि इस फासले को तय करने में 40 मिनट से अधिक का समय लग जाता है. जर्जर सड़क के कारण पिछले छह माह में पांच लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. अगस्त माह में सर्पदंश के बाद एक दादा और पोते को अस्पताल ले जाने में दो घंटे की देरी हो गयी, जिससे रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी. इसके अलावा, गड्ढों के कारण हुई बाइक दुर्घटनाओं में दो युवकों और एक अधेड़ को अपनी जान गंवानी पड़ी. दो दशक पहले बनी यह सड़क अब बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है. न स्वास्थ्य, न सिंचाई, पलायन ही एकमात्र सहारा : धौरा गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है. स्वास्थ्य सेवा के नाम पर गांव में कुछ भी नहीं है. गांव की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, लेकिन सिंचाई के साधनों के अभाव में किसान बेबस हैं. नतीजा यह है कि रोजगार की तलाश में अधिकांश ग्रामीण दूसरे प्रदेशों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं. शिक्षा के लिए एक मध्य विद्यालय तो है, लेकिन उसके भवन जर्जर होकर ढहने की कगार पर हैं. जर्जर सड़क से रिश्तों में आ रही खटास : सबसे विचित्र और दुखद स्थिति रिश्तों को लेकर है. ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर सड़क और पिछड़ेपन के कारण कोई भी पिता अपनी बेटी का विवाह इस गांव में नहीं करना चाहता. यहां तक कि लड़कियां भी इस बदहाल गांव में बहू बनकर आने को तैयार नहीं हैं. जर्जर सड़क की शिकायत विधायक डॉ रामेश्वर उरांव, सांसद सुखदेव भगत और पिछले चार उपायुक्तों से लिखित व मौखिक तौर पर की गयी, लेकिन हर बार केवल आश्वासन की घुट्टी पिलायी गयी. बोलें ग्रामीण : अब डीसी से ही उम्मीद : धौरा गांव निवासी मिथिलेश कुमार सिंह, कार्तिक मुंडा, संजय उरांव, प्रदीप उरांव, अशोक उरांव और एतवा उरांव ने कहा कि सलगी से धौरा तक की सड़क हमारे लिए जी का जंजाल बन गयी है. कई लोग रिश्ता लेकर गांव पहुंचे, लेकिन सड़क देखते ही पैर पीछे खींच लिये. गांव में सुविधाओं का घोर अभाव है. ग्रामीणों ने अब वर्तमान उपायुक्त डॉ कुमार ताराचंद से गुहार लगायी है. उन्हें उम्मीद है कि संवेदनशील उपायुक्त गांव की समस्या को समझते हुए सड़क निर्माण करायेंगे और बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायेंगे.
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