प्रतिनिधि, कुड़ू
बालू की किल्लत और लगातार बढ़ती कीमतों के कारण अबुआ आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. प्रखंड के 14 पंचायतों में हजारों लाभुक आवास निर्माण कार्य को अधूरा छोड़ने को विवश हैं. स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, बालू लदे ट्रैक्टरों की जब्ती और अवैध खनन पर कार्रवाई के बाद बालू की आपूर्ति बाधित हो गयी है. वहीं बालू की कीमत 2500 से 3000 रुपये प्रति ट्रैक्टर तक पहुंच चुकी है, जिससे गरीब लाभुकों को निर्माण कार्य जारी रखना मुश्किल हो गया है.यदि प्रखंड प्रशासन और खनन विभाग बालू की नियमित, पारदर्शी और सस्ती आपूर्ति की व्यवस्था नहीं करता, तो राज्य और केंद्र की महत्वाकांक्षी योजनाएं कागजों तक ही सिमट जायेंगी.
चोरी-छिपे 3000 रुपये में बिक रहा बालू
मुखिया को चालान मिलने के बाद भी लाभुक वंचित
प्रखंड प्रशासन की ओर से संबंधित पंचायतों के मुखिया को खनन चालान जारी किया गया है, ताकि सरकारी निर्माण कार्यों में सुलभ और सस्ती दर पर बालू की आपूर्ति की जा सके. परंतु ट्रैक्टर मालिक अवैध खनन में अधिक लाभ के चलते चालान से बालू ढुलाई करने से बच रहे हैं.बालू की किल्लत नहीं : सीअो
वर्तमान स्थिति :
2023-24:अबुआ आवास : 677 स्वीकृत
110 पूर्ण300 लगभग पूर्ण
279 अधूरे2024-25
अबुआ आवास : 2450 स्वीकृत1900 को पहली किस्त दी गयी
544 ने दूसरी किस्त के लिए आवेदन किया1356 ने गड्ढा खोद कर छोड़ दिया
प्रधानमंत्री आवास (2024-25) 3400 स्वीकृत1700 निर्माण की प्रक्रिया में
लगभग 1500 कार्य बालू के कारण रुकेलाभुक कर्ज लेने को मजबूर
बालू की ऊंची कीमत ने लाभुकों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है. जो बालू 1000 से 1200 रुपये में मिलना था, वह अब 2500 से 3000 रुपये में मिल रहा है. इससे मजबूर होकर कई लाभुक कर्ज लेकर आवास निर्माण करने पर विवश हैं.
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